अपनी मांगों को लेकर 12 लाख राज्यकर्मी मंगलवार से बेमियादी हड़ताल पर हैं। खबर आ रही है कि तहसील, निबंधन सहित लगभग सभी विभागों में कार्य ठप है जिससे फरियादियों को काफी दिक्कत हो रही है।
इंदिरा भवन, सिंचाई भवन, सहकारिता भवन, पीडब्ल्यूडी विभाग बंद हैं। राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के अध्यक्ष अजय सिंह और उनकी टोली सभी विभागों में जाकर जायजा ले रही है।
हालांकि कलेक्ट्रेट कार्यालय खुला है लेकिन ज्यादातर आला अधिकारी मोहर्रम में ड्यूटी पर होने की वजह से कार्यालय में नहीं हैं।
यह भी खबर मिल रही है कि कर्मचारी विधानसभा के सामने छोटे-छोट समूहों में पहुंचने लगे हैं।
बताते चलें कि कर्मचारियों को मनाने की सरकार की सभी कोशिशें नाकाम हो गईं। बहरहाल जरूरी सेवाओं मसलन चिकित्सा व रोडवेज को हड़ताल से अलग रखा गया है।
सोमवार देर रात तक कर्मचारी नेता हड़ताल को सफल बनाने की रणनीति बनाने में जुटे रहे। वहीं सरकार ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
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यह भी कहा गया है कि अगर हड़ताली किसी कर्मचारी को काम करने से जबरन रोकते हैं, तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद व राज्य कर्मचारी महासंघ के साझा मंच ‘राज्य कर्मचारी अधिकार मंच’ ने हड़ताल का आह्वान किया है।
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मंच के अध्यक्ष मंडल अजय सिंह व हरिकिशोर तिवारी का कहना है कि करीब 200 संगठन इसमें शामिल हो रहे हैं।
कुछ विभागों के जो एकाध संगठन रह गए हैं वे भी एक-दो दिनों में हड़ताल में शामिल हो जाएंगे।
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया था। लेकिन साफ कह दिया गया है कि इस बार बगैर मांगें माने हड़ताल वापस नहीं होगी।
कर्मचारियों की मांगें
वेतन विसंगतियां दूर की जाएं।
सभी विभागों में पदोन्नति के लिए कम से कम 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित हो।
पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल हो।
केंद्र की तरह आवास, परिवहन व बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता मिले।