लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद मंगलवार को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी भंग कर दी। प्रदेश में ओवरहॉलिंग के लिए यह कार्रवाई की गई है। साथ ही जिला, शहर व ब्लाक इकाइयां भी पूरी तरह भंग हो गई हैं।
हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री अपने पद पर फिलहाल बने रहेंगे। मंगलवार को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने इस बात की औपचारिक घोषणा कर दी।
प्रदेश में कांग्रेस का सबसे बुरा हाल रहा। उसे 80 सीटों में मात्र दो सोनिया व राहुल गांधी की सीट पर जीत मिली है।
जमानत तक नहीं बचा पाए कांग्रेसी दिग्गज
लोकसभा चुनाव में सभी कांग्रेस प्रत्याशियों की हालत बहुत बुरी रही जबकि 2009 के चुनाव में कांग्रेस के पास यूपी से 22 सीटें थीं। कांग्रेस के ज्यादातर दिग्गज अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए।
इस करारी हार के बाद केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश में ऊपर से नीचे तक बदलाव करना चाह रहा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी भंग करने का निर्णय इसी रणनीति का हिस्सा है।
यह भी माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री भी पद से हटाए जा सकते हैं।
दरअसल, कांग्रेस में यह परंपरा है कि जब तक नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा नहीं हो जाती तब तक पुराने अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं।
गठन में लगे थे 550 दिन
जिस प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन में पूरे 550 दिन लगे वह केवल 131 दिन ही रह सकी। लोकसभा चुनाव से पहले इसी साल 30 जनवरी को 288 पदाधिकारियों की जंबो कार्यकारिणी बनाई गई थी।
सभी को संतुष्ट करने के लिए इसका आकार बड़ा रखा गया। इसके बावजूद प्रदेश में कांग्रेस की साख नहीं बची।
2012 के विधानसभा चुनाव के बाद निर्मल खत्री को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई थी। लेकिन वे डेढ़ साल तक अपनी कार्यकारिणी ही नहीं बना पाए। केवल 10 प्रवक्ताओं के सहारे उन्होंने पूरे डेढ़ साल काट दिए।
केंद्रीय नेतृत्व ने दी थी मंजूरी
इसके बाद चुनाव से पहले 30 जनवरी को केंद्रीय नेतृत्व से अनुमोदन के बाद प्रदेश प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने लंबी-चौड़ी प्रदेश कांग्रेस कमेटी गठित कर दी।
जिस कार्यकारिणी की खोज में डेढ़ साल का समय लगा वह चार महीने 10 दिन में ही सिमट गई। बड़ी कार्यकारिणी के पीछे कांग्रेस की सोच यह थी कि प्रदेश में गुटबाजी को हवा न मिले।
इसलिए इसमें बुजुर्ग से लेकर युवा सभी को रखा गया। प्रदेश कार्यकारिणी में 32 उपाध्यक्ष, 61 महामंत्री, 134 सचिव, 45 सदस्य कार्यकारिणी, 13 संगठन मंत्री, दो स्थायी आमंत्रित सदस्य व एक कोषाध्यक्ष थे।
पिछले दिनों हार की समीक्षा करने लखनऊ आए मधुसूदन मिस्त्री ने इस बात के संकेत दिए थे कि शीघ्र ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी भंग की जाएगी।
केवल एक बैठक ही हो पाई
प्रदेश कांग्रेस की यह कार्यकारिणी केवल एक बैठक ही कर सकी। 30 जनवरी को गठन के बाद फरवरी में एक बैठक हुई।
प्रदेश प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री की अध्यक्षता में हुई यह बैठक केवल परिचय तक सिमट गई।
इसके बाद लोकसभा चुनाव आ गया। इसमें कार्यकारिणी कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा सकी।
लोकसभा चुनाव में हार के कारणों पर मंथन के इतनी देर बाद कमेटी को भंग करना, केंद्रीय नेतृत्व के ढीले रवैये के तौर पर भी देखा जा रहा है।