लोकसभा चुनाव में जीत का झंडा फहराने के बाद प्रदेश भाजपा अब मिशन मोदी के दूसरे चरण की तैयारी में जुट गई है। जिससे मोदी इफेक्ट को विधानसभा चुनाव तक बनाए रखा जाए। इसके तहत दो तरह के काम करने का फैसला किया गया है।
एक तो केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना तो दूसरी तरफ प्रदेश सरकार के खिलाफ जमीन पर माहौल बनाना। इसके लिए निकट भविष्य में पार्टी के सम्मेलन व सभाएं भी करने की योजना है।
इसका पूरा रोडमैप बनाने के लिए बुधवार को यहां पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। बैठक में पिछले के साथ ही नए कार्यक्रमों का फैसला होगा।
कांठ मुद्दे पर भी होगी चर्चा
बैठक में मुरादाबाद के कांठ की लड़ाई को और धार देने की रणनीति बनाई जाएगी। प्रदेश के नवनियुक्त महामंत्री संगठन के नाते सुनील बंसल की प्रदेश में यह प्रदेश पदाधिकारियों के साथ पहली औपचारिक बैठक होगी।
वैसे लोकसभा चुनाव नतीजों के आने के बाद भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों की यह पहली बैठक होगी। इस नाते बैठक में नतीजों की औपचारिक समीक्षा भी होनी चाहिए। पर, इसकी संभावना न के बराबर है।
एक तो चुनाव नतीजे आए इतना समय बीत चुका है कि अब उन पर बातचीत होने का कोई अर्थ नहीं है। साथ ही इस बीच, प्रदेश के महामंत्री संगठन बंसल कई क्षेत्रों में जाकर बैठक कर चुके हैं।
जिससे उनके पास जरूरी फीडबैक आ चुका होगा। माना जा रहा है कि उस फीडबैक के आधार पर भी वह पदाधिकारियों से बातचीत करेंगे।
उतारनी है जीत की खुमारी
दरअसल, भगवा टोली के रणनीतिकार अब पार्टी कार्यकर्ताओं पर चढ़ी जीत की खुमारी को उतारना चाहती है।
जिससे 2017 के विधानसभा चुनाव के साथ-साथ निकट भविष्य में विधानसभा की 12 सीटों और लोकसभा की एक सीट के उपचुनाव में कहीं किसी स्तर पर कोई चूक न रह जाए।
साथ ही विधानसभा चुनाव से पहले निकट भविष्य में होने वाले विधान परिषद के तथा पंचायतों के चुनाव में भी भाजपा का प्रदर्शन ठीक रहे। इसीलिए बुधवार की बैठक में मुख्य फोकस ऐसे कार्यक्रम तय करने पर रहेगा।
जिनके जरिये लोगों से संपर्क व संवाद निरंतर होता रहे। साथ ही लोकसभा चुनाव में मोदी के जरिये हुई पहुंच को पार्टी की पकड़ में तब्दील किया जा सके।
मुस्लिम तुष्टीकरण पर घेरने की कोशिश
बैठक दो चरणों में होगी। पहली बैठक सुबह होगी। जिसमें प्रदेश पदाधिकारियों के साथ मोर्चों के अध्यक्ष भी शामिल रहेंगे।
दूसरी बैठक दोपहर बाद होगी, जिसमें पार्टी के प्रकोष्ठों के संयोजक रहेंगे। बैठकों में संगठनात्मक के साथ आंदोलनात्मक कार्यक्रम का खाका खींचा जाएगा।
यह भी तय होगा कि कांठ के मुद्दे पर प्रदेश की सरकार को लोगों के बीच किस तरह कठघरे में खड़ा किया जा सके। साथ ही उन्हें यह बताया जा सके कि प्रदेश सरकार मस्लिम तुष्टीकरण से बाज नहीं आ रही है।
बैठक में बूथ कमेटियों से लेकर मोर्चा व प्रकोष्ठों की स्थिति व ताकत भी समीक्षा होने के संकेत हैं।