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अयोध्या विवाद में श्री श्री रविशंकर ने फिर शुरू की पहल, सुलह-समझौते की कोशिशें तेज

Mon, 12 Nov 2018 11:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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हाजी महबूब से वर्ता करते श्रीश्री के दूत गौतम विग
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श्री श्री रविशंकर एक बार फिर सोमवार को अयोध्या विवाद में कूद गए। श्री श्री का संदेश लेकर उनके दूत गौतम विग ने मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब से मुलाकात की। हाजी महबूब ने भी श्री श्री के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उनके मुहिम न सिर्फ समर्थन किया, बल्कि तमाम मुस्लिमों से हस्ताक्षर कराकर समझौते की कोशिशों पर अपनी सहमति भी दी। कहा कि श्रीश्री अयोध्या विवाद निपटा सकते हैं।

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अयोध्या पहुंचे श्रीश्री के दूत गौतम विग ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं, लेकिन कोर्ट दिलों को एक साथ नहीं ला सकता। गुरुदेव का मानना है कि बातचीत से मसला हल होगा तो लंबे समय तक दोनों समुदायों में अमन-चैन कायम रहेगा। मुस्लिम पक्ष बातचीत के लिए राजी है। गुरुदेव मुहिम को आगे बढ़ाना चाहते हैं, जब जैसी जरूरत पड़ेगी गुरुदेव स्वयं भी मौजूद रहेंगे। 
 
मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि श्री श्री रविशंकर एक सकारात्मक सोच के इंसान है। उनके खयालात अच्छे लगते हैं। उनकी मुहिम का हम स्वागत करते हैं। हमें उम्मीद है कि उनके प्रयास से मामला का हल हो सकता है। कहा कि यदि आगे भी सही दिशा में प्रयास रहे तो हम उनके साथ रहेंगे। मुस्लिम समाज भी श्री श्री के साथ होगा। इस दौरान मोहम्मद उमर, मोहम्मद आजम,मौलाना जलाल अशरफ, मौलाना मोहम्मद असलम, अब्दुल वाहिद सहित अन्य मौजूद रहे। 

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श्री श्री के प्रयास से कुछ नहीं होने वाला : इकबाल  

मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने श्री श्री के सुलह-समझौते के प्रयासों को खारिज कर दिया। कहा कि उनके प्रयास से कुछ नहीं होने वाला है। वह पक्षकार भी नहीं है। हम उनके साथ नहीं जा रहे। हम हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास के नेतृत्व में सुलह-समझौते का प्रयास करेंगे। अयोध्या का मामला पक्षकार व संत-धर्माचार्य आपस में बैठकर निपटा सकते हैं। बताया कि इसके लिए एक-दो दिन में मुहिम शुरू होने जा रही है।  
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विफल हो चुकी है श्री श्री के सुलह-समझौते की मुहिम 

श्री श्री रविशंकर अयोध्या मामले के समाधान के लिए पिछले वर्ष मुहिम चला चुके हैं। 16 नवंबर 2017 को वे अयोध्या पहुंचे थे और संत-धर्माचार्यों सहित पक्षकारों से मुलाकात की थी। लेकिन उनकी मध्यस्थता न राममंदिर आंदोलन से जुड़े संत-धर्माचार्यों को भाई थी और न ही पक्षकारों को। विहिप ने तो उनकी मुहिम का पूरी तरह से बहिष्कार किया था। निर्मोही अखाड़ा से डील का मुद्दा भी उनकी मुहिम को दागदार करने वाला रहा, इस दौरान इसको लेकर श्री श्री भी असहज हो गए थे। संत-धर्माचार्यों से लेकर पक्षकारों ने भी उनके विरुद्घ तल्ख टिप्पणियां की थी। अब एक बार फिर श्री श्री अयोध्या मामले में कूद पड़े हैं, उनके दूत के रूप में अयोध्या पहुंचे गौतम विग नए सिरे से मुहिम की शुरूआत करने के लिए पटकथा तैयार करने में जुट गए हैं।
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