धर्म से लेकर राजनीति और संस्कारों से लेकर आचार-विचार तक में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का उदाहरण अपने पूरे देश में दिया जाता है। माता सीता को पूजा जाता है। बजरंगबली की पूजा-अर्चना होती है और हर साल रामलीला के प्रसंगों का मंचन होता है और रावण वध भी किया जाता है।
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लेकिन शायद आपको यह जानकर आश्चर्य हो कि रावण की नगरी यानी लंका यानी श्रीलंका में राम को कोई नहीं जानता। न सीता की पूजा होती है और न ही रामलीलाएं। इतना ही नहीं श्रीलंका की पाठ्य पुस्तकों में न तो रामायण के अंश पढ़ाए जाते हैं, न ही साहित्य में कहीं राम का जिक्र मिलता है।
न ही राम के मंदिर वहां पर हैं। हां, मेघनाद, लंका नरेश, लंकाधीश, इंद्रजीत, विभीषण के नामों से लोग थोड़ा-बहुत जरूर परिचित हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स, कोलम्बो (श्रीलंका) में इंडियन डांस डिपार्टमेंट की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजलि मिश्रा ने यह जानकारी दी।
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वह बुधवार को अयोध्या के रामकथा पार्क में श्रीलंकाई रामलीला के मंचन के लिए आई हैं। अयोध्या जाने से पहले वह राजधानी में रुकीं तो अमर उजाला से उन्होंने श्रीलंकाई रामलीला से लेकर रामायण के किरदारों तक पर खुलकर बात की।
पर्यटन ने बदली सूरत, बढ़ी राम की लोकप्रियता
डॉ अंजलि मिश्रा
- फोटो : amar ujala
अंजलि मिश्रा ने बताया कि श्रीलंका में पिछले पांच वर्षों में रामायण को लेकर खासा रुझान पैदा हुआ है, जिसकी वजह है पर्यटन। दरअसल, श्रीलंका सरकार को रामायण टूर से खासा फायदा होता है, इसलिए सरकार ने रामायण रिसर्च सेंटर स्थापित किया है, जहां रामायण से जुड़ी जगहों की तलाश व उन पर रिसर्च की जा रही है। हनुमान जी के पदचिह्न ढूंढे गए हैं।
जब बात श्रीलंका की होती है तो रावण की सोने की लंका का जिक्र जरूर आता है। डॉ. मिश्रा बताती हैं कि श्रीलंका में एक जगह है रतनपुर, जहां भरपूर रत्न मिलते हैं। इसलिए ऐसा माना जाता है कि यहीं पर रावण का महल रहा होगा, जो कालांतर में खत्म हो गया और रत्न वहीं से निकल रहे हैं।
रामायण में प्रसंग है कि रावण ने सीता का हरण कर उन्हें अशोक वाटिका में रखा था। लेकिन हकीकत यह है कि रावण ने उन्हें श्रीलंका में कई जगह रखा था और जगह बदली जाती थी। मसलन, सीता ऐली ऐसी ही खास जगह है, जिसे लेकर पर्यटकों में खासा रुझान रहता है।
श्रीलंका में तीन डांस प्रचलित हैं। पाहतरट, उडरट व सबरगम। इसमें पाहतरट में नाट्य शास्त्र के सारे अंग संचलन मिलते हैं। इसलिए रामलीला के प्रसंगों को पेश करने के लिए पाहतरट का इस्तेमाल होता है। इस काव्य को नृत्य में पिरोकर पेश किया जाता है। इसके अतिरिक्त वेशभूषा भी अलग होती है। यहां रामलीला में ढीले-ढाले व खुले वस्त्राें का इस्तेमाल होता है, जबकि श्रीलंका में वेशभूषा पर खास फोकस होता है।
अपनी टीम के साथ डॉ अंजलि मिश्रा
- फोटो : amar ujala
डॉ. अंजलि मिश्रा ने बताया कि अयोध्या में होने वाली रामलीला में त्रिजटा-सीता संवाद का मंचन होगा। पाहतरट नृत्य में पिरोकर इसे पेश किया जाएगा। दृश्य हनुमान जी के समुद्र लांघकर अशोक वाटिका पहुंचने से शुरू होगा, जहां काव्य के रूप में संवाद किया जाएगा। यह प्रस्तुति साढ़े सात मिनट की होगी, जिसमें तबला व गायन श्रेयान चंद्रशेखर एवं निमंत होशान का होगा।
मूलरूप से गाजीपुर की रहने वाली डॉ. अंजलि मिश्रा ने लखनऊ के कथक गुरु सुरेंद्र सैकिया से नृत्य सीखा। यहीं भातखण्डे विश्वविद्यालय के पासआउट निमंत होशान से उन्होंने शादी की और श्रीलंका शिफ्ट हो गईं। जहां यूनिवर्सिटी ऑफ विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स, कोलम्बो में इंडियन डांस डिपार्टमेंट की विभागाध्यक्ष हैं, जबकि उनके पति भी इसी विश्वविद्यालय में जॉब करते हैं। पाहतरट डांस में ही उन्होंने पीएचडी भी की है।
राम के किरदार में सामप्रिय गमलत, सीता के रोल में डॉ. अंजलि मिश्रा, रावण की भूमिका में इमारा बसनायक मुख्य किरदार होंगी। इसके अतिरिक्त बुधवार को अयोध्या में होने वाली श्रीलंकाई रामलीला के मंच पर दिनुशा प्रेमरतन त्रिजटा, निमेसी तत्सरणी हनुमान बनेगी। साथ ही मायुका विक्रमशेखर, चिलनी भाग्या, सुसीमी लक्षरी भी नृत्य करेंगी।