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आईएएस की दबंगईः गर्ल्स हॉस्टल में घुसे और...

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एलयू के कैलाश गर्ल्स हॉस्टल में घुसने से रोके जाने पर सीनियर आईएएस टीपी पाठक ने प्रोवोस्ट प्रो. शीला मिश्रा से बदसुलूकी की।
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टीपी पाठक राज्य लोक सेवा अभिकरण के सदस्य है। वह हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस दिए जाने के मामले में पैरवी करने बृहस्पतिवार दोपहर हॉस्टल गए थे।

लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने हॉस्टल के गेट पर ही उनकी सरकारी गाड़ियां रोक लीं। इससे पाठक नाराज हो गए और पैदल ही चलकर प्रोवोस्ट के कार्यालय में घुस गए और जोर-जोर से चिल्लाते हुए उन्हें धमकाना शुरू कर दिया।
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उन्होंने प्रो. मिश्रा से कहा- ‘...मैं तुम्हारे कुलपति से भी ऊंचा ओहदा रखता हूं। ...आखिर तुम्हारी हिम्मत कैसे पड़ गई कि मेरी गाड़ियां हॉस्टल के अंदर नहीं आने दी।’
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महिला आयोग में दर्ज होगी शिकायत

प्रोवोस्ट ने शुक्रवार को इसकी लिखित शिकायत कुलपति से की है। अब वह इस मामले को महिला आयोग में भी दर्ज करवाएंगी। प्रोवोस्ट प्रो. शीला मिश्रा का कहना है कि सुरक्षा नियमों के मुताबिक, गर्ल्स हॉस्टल में किसी बाहरी व्यक्ति को आने की इजाजत नहीं है।

उन्होंने कहा कि चाहे कोई कितना भी बड़ा अधिकारी या नेता क्यों न हो, हम नियमों से कभी समझौता नहीं करते। क्योंकि यहां पर करीब 500 छात्राएं रहती हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है।

प्रो. शीला मिश्रा कहती हैं कि रजिस्ट्रार देवेंद्र पांडेय ने भी एक सीनियर आईएएस अधिकारी होने के नाते हमने सिफारिश की, लेकिन हम अपने नियमों से ऊपर किसी को नहीं होने देंगे।

प्रोवोस्ट ने बताया, कैलाश गर्ल्स हॉस्टल में अंदर आने के लिए सिर्फ छात्रा के अभिभावक हों,  उसके स्थानीय अभिभावक या अभिभावक द्वारा नामित विजिटर को ही इजाजत हैं।
 
टीपी पाठक इन तीनों ही श्रेणियों में नहीं थे। इसलिए गार्ड ने उन्हें अंदर आने से रोक दिया। जिस तरह टीपी पाठक ने मेरे साथ अभद्रता की, वह निंदनीय है।
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टीपी पाठक ने दी सफाई

संभ्रांत व्यक्ति होने के कारण मैंने अंदर जाने की इजाजत मांगी थी। आखिर एक सीनियर आईएएस अधिकारी को बार-बार अपनी पहचान बतानी पड़े और उसे कठघरे में खड़ा किया जाए तो यह भी अच्छा व्यवहार नहीं है।

मैं सरकारी गाड़ियां वहां लेकर गया था, सुरक्षाकर्मियों ने जिस तरह रोका वह ठीक नहीं था। फिलहाल प्रोवोस्ट ने अपने अधिकारों व सुरक्षा की दृष्टि से जो कुछ किया वह ठीक ही है, बाकी ज्यादा इस मुद्दे पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता।

मैं प्रोवोस्ट से मिलने गया था और अगर गलती होती तो उनके सामने उस छात्रा को ही डांटता। मगर यह नौबत ही नहीं आई और पहले ही हंगामा खड़ा हो गया।
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