प्रतियोगिता के दौरान अपने डॉगीज के साथ युवतियां।
लखनऊ। विदेशी नस्ल के डॉगी को पालना महंगा शौक है। अवध केनेल क्लब की तरफ से रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित दो दिवसीय डॉग शो में देशभर से आए डॉगीज के मालिकों ने बताया कि पहले तो इन्हें लाखों की कीमत खर्च कर मंगाया जाता है, बाद में इन्हें पालने पर हर महीने 20 हजार से लेकर पांच लाख तक का खर्चा है।
कोलकाता के व्यवसायी पल्लब साहा ने बताया कि उनके डॉगीज की कीमत लाखों में है। 2.5 साल की नैटिनी और छह महीने की किमछी की मां रूस की है तो उसके पिता को वे अमेरिका से लेकर आए थे। इस वक्त उनके पास 43 डॉगीज हैं। इन पर एक महीने में पांच लाख रुपये तक खर्च हो जाते हैं।
डॉगीज के लिए थाईलैंड से आता है छह हजार का शैंपू
दिल्ली से शित्जू ब्रीड के डॉगी को लेकर आए सोलंकी ब्रदर्स बताते हैं कि ये डॉगीज हमारे घर के बच्चों जैसे हैं, खिलौैने हैं। वे इनके लिए छह हजार रुपये का शैंपू थाईलैंड से मंगवाते हैं। पॉमेरैनियन ब्रीड के डॉगी चिप्स के साथ आए बंगलूरू के दिलीप बताते हैं कि अमेरिकन प्रोडक्ट थाइलैंड से आसानी से मिल जाते हैं, इसलिए शैंपू से लेकर अन्य सामान भी थाईलैंड से आता है। हर महीने 50 हजार से ज्यादा का खर्च है। कोलकाता से ही आए ऑस्ट्रेलियन शेफर्ड के मालिक सिद्धार्थ बताते हैं कि डॉगी ऐस्टिन को दो साल पहले ऑस्ट्रेलिया से लाए थे। इस पर हर महीने 80 हजार तक का खर्चा होता है।
नैटिनी और किमछी ने जीते नौ पुरस्कार
डॉग शो के दूसरे दिन रविवार को विजेता डॉगीज के मालिकों को पुरस्कृत किया गया। आयोजक आरएस बाजपेयी ने बताया कि कोलकाता के पल्लब साहा के स्पैनिअल अमेरिकन कॉकर ब्रीड की नैटिनी और किमछी ने दो दिन में हुई तीन राउंड प्रतियोगिता में बेस्ट इन शो समेत नौ पुरस्कार जीते।