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जानें, सपा की साइकिल चलाएंगे या कमल खिलाएंगे कुशवाहा

Sat, 06 Feb 2016 12:44 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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चार साल बाद जेल से बाहर आए बाबू सिंह कुशवाहा अब कहां और किस भूमिका में रहेंगे, इस पर सबकी नजर है। कभी मायावती के करीबी रहे कुशवाहा कमल खिलाएंगे या साइकिल पर सवार होंगे, सियासी हल्कों में चर्चा गरम है।
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एक चर्चा यह भी है कि वे परदे के पीछे से किसी दल के लिए काम कर सकते हैं, जैसा विधायक चुनाव में उन्होंने किया था। भाजपा की सदस्यता स्थगित करवा कर अपने जन अधिकार मंच से उसके लिए प्रचार किया था।

सियासी पंडितों की माने तो कुशवाहा के परदे के पीछे ही रहकर राजनीतिक तौर पर सक्रिय रहने की संभावना ज्यादा है। उन्हें अगर खुलकर सक्रिय होना भी होगा तो भी दिसंबर तक का वक्त लेंगे। जिसकी भी मदद करनी होगी वह मदद पुराने पैटर्न पर अलग संगठन से अपना किरदार निभा सकते हैं।
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राहुल गांधी ने सार्वजनिक कर दी थी उनकी बातें

कुशवाहा लंबे अरसे तक बसपा में रह चुके हैं। भाजपा के साथ उनके संपर्क जगजाहिर हैं। विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के सदस्य बने लेकिन विवाद हुआ तो सदस्यता स्थगित करवा दी। उनका पूरा कुनबा इस समय साइकिल पर ही सवार है।

उनकी पत्नी शिवकन्या गाजीपुर से सपा के टिकट पर बीते लोकसभा चुनाव में लड़ ही चुकी हैं।

रही बात कॉंग्रेस की तो पार्टी राहुल गांधी ने 2012 में ही यह बात सार्वजनिक कर दी थी कि भाजपा में शामिल होने से पहले बाबू सिंह ने उनसे संपर्क किया थे।
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इसलिए पार्टियों के लिए जरूरी है कुशवाहा

अति पिछड़ी जातियों में मानी जाने वाली काछी, कुशवाहा, शाक्य, मौर्य, मुराव व मुराई बिरादरी प्रदेश में लगभग 5 प्रतिशत है। इसी गणित के आधार पर कुशवाहा को भाजपा ने अपने साथ लिया था।

कुशवाहा द्वारा भाजपा नेतृत्व को अपनी सदस्यता स्थगित करने का पत्र लिखे जाने के बावजूद पार्टी ने 2012 के चुनाव में बाबू सिंह का भरपूर इस्तेमाल किया।

खासतौर से फर्रुखाबाद, कन्नौज, मुरादाबाद अन्य उन इलाकों में कुशवाहा भाजपा के लिए वोट मांगने गए थे जिन इलाकों में यह बिरादरी अच्छी संख्या में है।
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