बिजली समस्या को लेकर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के खिलाफ सपा ने मोर्चा खोल दिया है।
समाजवादी पार्टी ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल से पूछा है कि यूपी के साथ बिजली पर घिनौना खेल क्यों खेला जा रहा है? साथ ही कहा, यह विडंबना है कि प्रदेश से निर्वाचित भाजपा के 71 सांसद मतदाताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे।
प्रदेश के हितों की अनदेखी व उपेक्षा पर उन्होंने कभी केंद्र सरकार से विरोध नहीं जताया। सपा के प्रदेश प्रवक्ता और राजनीतिक पेंशन मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जो तथ्य रखे हैं उससे जाहिर होता है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सिर्फ अपनी बात पर जिद पकड़ कर बैठ गए है।
उन्होंने कहा, आबादी के लिहाज से यूपी, देश का सबसे बड़ा राज्य है। इसके साथ केंद्र सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। यूपी की उपेक्षा राजनीतिक कारणों से की जा रही है। यह असंवैधानिक है।
ये लगाए आरोप
केंद्र की उपेक्षा के कारण प्रदेश के सभी बिजलीघरों को पर्याप्त मात्रा में कोयला आपूर्ति नहीं होने से क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं हो रहा है। अनपरा और पारीछा बिजलीघरों में कोयले के अभाव में बिजली उत्पादन कम हो गया है। रोजा पावर प्लांट बंद है।
सपा प्रवक्ता ने कहा, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री का दावा है कि केंद्रीय कोटे से यूपी को सबसे ज्यादा बिजली दी जा रही है। लेकिन यह हकीकत नहीं है।
सात सितंबर को यूपी को केंद्रीय कोटे से 5,863 मेगावाट बिजली आवंटित की गई जबकि 3,972 मेगावाट बिजली की ही सप्लाई हुई।
राजेंद्र चौधरी ने कहा, यूपी से लगभग दस फीसदी आबादी वाले दिल्ली राज्य को प्रदेश के आवंटन के 70 प्रतिशत के बराबर बिजली आवंटन किया गया है। महाराष्ट्र को 5,788 मेगावाट के कोटे के विपरीत 6,396 मेगावाट का आवंटन किया गया।
कानून-व्यवस्था का दिया हवाला
गौरतलब है कि बिजली को लेकर मचे हाहाकार पर पीयूष गोयल ने रविवार को यूपी सरकार हमला बोला था।
उन्होंने यूपी की बिजली समस्या के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वह खुद ही सहयोग नहीं कर रही है। प्रदेश की कानून-व्यवस्था का आलम यह है कि यहां ठेकेदार भी काम करना नहीं चाहते हैं।
केंद्रीय मंत्री रविवार को दिल्ली से टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 13 राज्यों के पत्रकारों से रूबरू हुए। उत्तर प्रदेश की बिजली समस्या पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में पीयूष गोयल ने कहा कि यहां की समस्या को लेकर हम संजीदा हैं।
हमने कई बार मुख्यमंत्री से बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। शायद मुख्यमंत्री ज्यादा व्यस्त थे। कानून-व्यवस्था की समस्या यूपी में ज्यादा है, शायद इसीलिए मुख्यमंत्री बिजली पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
प्रदेश सरकार नहीं कर रही सहयोग
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को पूरे देश में सबसे ज्यादा बिजली का कोटा मिलता है। यहां 6384 मेगावाट बिजली सेंट्रल कोटे से दी जाती है।
यूपी से 73 सांसद भाजपा के हैं, लेकिन हमें अफसोस है कि हम यूपी के लिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं। हैरत की बात यह है कि प्रदेश में बिजली संकट है लेकिन यूपी सरकार की ओर से बिजली क्षेत्र के एक भी प्रस्ताव केंद्र नहीं आते हैं।
गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए केंद्र सरकार काफी कुछ करना चाहती है लेकिन प्रदेश सरकार का सहयोग नहीं मिल रहा। सोलर पावर प्लांट के लिए भी यूपी सरकार जमीन नहीं दे रही।
उन्होंने कहा कि यूपी सरकार ने 30 मई को कम बिजली देने के आरोप लगाए। हमने अगले ही दिन से 377 मेगावाट बिजली की व्यवस्था की, लेकिन दो-तीन दिन बिजली लेने के बाद यूपी ने इसे लेना बंद कर दिया। प्रदेश में 42 फीसदी लाइन लॉस है। पहले इसे घटाने के प्रयास करने चाहिए।