प्रदेश में शेष दो चरणों के चुनाव से पहले सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने मुसलमानों को अपने पाले में खींचने के लिए एक और दांव चल दिया है।
राज्य सरकार ने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के सालाना उर्स के मौके पर 6 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के लिए चुनाव आयोग को प्रस्ताव भेजकर अनुमति मांगी है।
प्रदेश में 47 संसदीय सीटों पर चुनाव हो चुके हैं और पांचवें तथा छठे चरण में 7 व 12 मई को 33 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंतिम दो चरणों में बढ़त लेने के लिए सपा ने पूरी ताकत झोंक रखी है।
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत पार्टी के सभी नेता मुसलमानों को पार्टी के साथ जोड़े रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं।
मुस्लिम हितैषी दिखना है मकसद
मतलब ये कि ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के सालाना उर्स के बहाने भी सरकार खुद को मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने की कोशिश में लगी है।
सरकार ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के उर्स पर 6 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित करना चाहती है। एक सरकारी प्रवक्ता ने रविवार को यहां बताया कि इस संबंध में अनापत्ति के लिए चुनाव आयोग को प्रस्ताव भेजा गया है।
गौरतलब है कि अब कई मुस्लिम धर्मगुरू सपा को वोट करने की अपील कर चुके हैं पर मुस्लिम सपा के साथ आएंगे इसे लेकर पार्टी अब भी कश्मकश में है।
अतः अब मुलायम और अखिलेश कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं।
सपा को है डर
समाजवादी पार्टी को डर है कि मुस्लिम वोट बैंक बसपा और कांग्रेस की तरफ जा सकता है। इसलिए पार्टी हर संभव इसे रोंकने का प्रयास कर रही है।
मुस्लिम वोट पाने के लिए पार्टी ने पहले ही कवायद शुरू कर दी थी। मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मुस्लिम टोपी पहनकर मीडिया के सामने आए थे।
इसके अलावा संभावना यह भी जताई जा रही है कि नरेंद्र मोदी की विकासोन्मुख छवि होने के कारण कुछ प्रतिशत मुस्लिम वोट उन्हें भी मिल सकता है।