पुलिस महकमे में जहां एक तरफ भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं जिन अफसरों पर भ्रष्टाचार और दुर्व्यवहार के आरोप लग रहे हैं, उन्हें छोटे जिले से बड़े जिले में भेजकर इनाम दिया जा रहा है।
ताजा मामला संभल का है। यहां के एसपी रवि शंकर छवि पर स्थानीय विधायक ने खराब व्यवहार और थानों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया तो शासन ने उन्हें वहां से हटाकर आजमगढ़ जैसे संवेदनशील जिले की कमान सौंप दी।
संभल के गुन्नौर क्षेत्र से विधायक अजीत कुमार उर्फ राजू यादव ने 16 अप्रैल को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रति पुलिस अधीक्षक रविशंकर का व्यवहार बहुत खराब है, इनकी मानसिकता पार्टी के विपरीत है।
विधायक ने आरोप लगाया था कि एसपी का अनुसरण करते हुए बाकी पुलिस कर्मी भी कार्यकर्ताओं को कोई तवज्जो नहीं दे रहे। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है। पत्र में यह भी लिखा कि थानों में भ्रष्टाचार चरम पर है और जनता का खुलेआम शोषण हो रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि संभल के एसपी को हटाकर यहां किसी कर्मठ और ईमानदार पुलिस अधीक्षक को तैनात किया जाए।
विधायक के इस पत्र का असर भी दिखा जब 29 अप्रैल को जारी सूची में एसपी रविशंकर छवि को वहां से हटा कर आजमगढ़ का एसएसपी बना दिया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर भ्रष्टाचार और खराब व्यवहार के लिए संभल से हटाया गया तो फिर उन्हें आजमगढ़ क्यों भेजा गया?
अगर आरोप गलत हैं, तो उन्हें हटाया क्यों गया? छवि के स्थान पर संभल भेजे गए आरएम भारद्वाज का जिले का यह पहला चार्ज है। वह पिछले साल ही प्रांतीय पुलिस सेवा से प्रमोट होकर आईपीएस बने हैं।
इस बारे में जब विधायक राजू यादव से बात की गई तो उन्होंने कहा, यहां पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं का शोषण किया जा रहा था। इसी नाते उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। खुशी है कि मुख्यमंत्री ने मेरा अनुरोध मान लिया और रविशंकर छवि को यहां से हटा दिया।