फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं: सपा

Sun, 13 Nov 2016 11:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
मुलायम ‌सिंह यादव - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
लखनऊ में सपा मुख्यालय में हुई पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा ने कहा कि यूपी चुनाव के लिए सपा कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी, अकेले ही चुनाव लड़ेगी।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने पहले ही कह दिया है कि हम गठबंधन नहीं करेंगे, बल्कि विलय के लिए तैयार हैं। बैठक में पार्टी की चुनावी तैयारियों, पुराने नोट बंद होने से मची अराजकता, राज्यसभा में नेता तय होने व चुनाव के लिए मंडलीय रैलियों की तैयारियों पर चर्चा हुई।

बैठक में यह तय हुआ कि रामगोपाल यादव की बर्खास्तगी के बाद राज्यसभा में नेता पर मुलायम फैसला करेंगे।

बैठक में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, किरनमय नंदा, सुरेंद्र मोहन आदि मौजूद थे। बैठक में इस बात की भी चर्चा हुई कि किसानों को खाद व बीज पुराने नोटों से ही उपलब्‍ध करवाए जाएं।
विज्ञापन


दरअसल सत्ता और संगठन में तालमेल मे कमी के कारण चुनावी तैयारियों में पिछड़ रही सपा के लिए यह बैठक अहम मानी जा रही थी। विधानसभा चुनाव आने को तैयार है लेकिन न तो मुलायम की मंडलीय रैलियों के कार्यक्रम तय हुए हैं और न ही सीएम अखिलेश यादव विकास रथ यात्रा का दूसरा चरण शुरू कर पाए हैं। आलम है कि निचले स्तर तक कार्यकर्ता ऊहापोह में हैं। बूथ कमेटियों के गठन का काम भी प्रभावित हो रहा है।

संसदीय बोर्ड की पिछली बैठक में समाजवादी विकास रथ चलाने समेत जो फैसले हुए, उन पर अमल नहीं हो रहा। सपा में दो माह से पारिवारिक संग्राम छिड़ा हुआ है। इस बैठक के बाद उम्मीद की जा रही है कि सपा के चुनावी कार्यक्रमों को गति मिल सकेगी।

इस तरह सतह पर आ गया सपा का विवाद

दो माह पहले अखिलेश को हटाकर शिवपाल सिंह यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उसी दिन अखिलेश ने शिवपाल के सभी महत्वपूर्ण विभाग छीन लिए थे।

तभी से परिवार का घमासान खुलकर सामने आ गया है। स्थिति यह है कि मुलायम परिवार के दो बड़े नेता रामगोपाल यादव और शिवपाल क्रमश: सपा संगठन और सरकार से बाहर हैं।

शिवपाल को अखिलेश ने मंत्री पद से बर्खास्त किया तो रामगोपाल को खुद सपा मुखिया ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। शिवपाल के अध्यक्ष बनने के बाद से सरकार और संगठन में तालमेल नजर नहीं आ रहा है। इसी वजह से सपा के कई कार्यक्रम स्थगित भी हुए।

मुलायम को अपने संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ से 6 अक्तूबर को सपा के चुनाव अभियान का श्रीगणेश करना था। परिवार के संग्राम के चलते इस कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा था। सीएम की समाजवादी विकास रथयात्रा तीन अक्तूबर के बजाय तीन नवंबर को शुरू हुई लेकिन उसके बाद से रथ के पहिये रुके हुए हैं।

ऊपर से नीचे तक दो फाड़ है सपा

भले ही सीएम या प्रदेश अध्यक्ष दावा करें परिवार में मतभेद नहीं है, लेकिन पूरी पार्टी दो खेमों में बंटी हुई है। अखिलेश को युवाओं के साथ ही पार्टी के बहुत सारे पुराने नेताओं का साथ मिला हुआ है। मंत्रियों, विधायकों की बड़ी टीम उनके साथ है।

इसके विपरीत चार सालों में उपेक्षित रहे नेता शिवपाल के इर्द-गिर्द जमा हो गए हैं। कुछ पुराने नेता, मंत्री व विधायक भी उनके पक्ष में हैं। उनके कुछ समर्थक खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।

भीड़ से आत्ममुग्ध, तेवर पड़े नरम
सीएम अखिलेश जहां तीन नवंबर के रोड शो में जुटी भीड़ से उत्साहित हैं, वहीं प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल रजत जयंती समारोह की कामयाबी से खुश हैं। दोनों ही आत्ममुग्ध हैं। उनके तेवर में नरमी दिख रही है। खुलकर एक-दूसरे खिलाफ नहीं बोल रहे हैं।

हालांकि, उनके समर्थक मुखर हैं। युवा टीम शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। अखिलेश समर्थक युवा नेताओं का सपा दफ्तर जाना बंद हो गया है। जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट ही उनका नया ठिकाना है। वहीं से उनकी गतिविधियां संचालित हो रही है।

प्रत्याशियों में बड़े बदलाव की तैयारी

सपा जल्द ही हारी हुई सीटों पर टिकटों में बदलाव करने जा रही है। पूर्वांचल की कई सीटों के प्रत्याशी बदले जाने से मुलायम ने हरी झंडी दे दी है। 40-50 पुराने उम्मीदवार बदल जाएंगे। समझा जा रहा है कि दोनों पक्षों से नरमी के संकेत के चलते सपा मुखिया संतुलन बनाकर प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लगाएंगे।

गोरखपुर में बदले दो उम्मीदवार
मुलायम के निर्देश पर शनिवार को गोरखपुर के दो प्रत्याशी बदल ‌दिए गए। प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल ने बताया कि अब सहजनवा सीट से पूर्व घोषित मनोह यादव की जगह यशपाल रावत पार्टी के उम्मीदवार होंगे।

इसी तरह चौरीचौरा में केशवनाथ यादव के स्‍थान पर दुर्गेश यादव को प्रत्याशी बनाया गया है। यशपाल पूर्वांचल के प्रमुख नेता रहे शारदा प्रताप रावत के बेटे हैं। यशपाल की मां प्रभावती भी विधायक रह चुकी हैं। दुर्गेश युवजन सभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्य रह चुके हैं।
विज्ञापन

रामगोपाल संसदीय बोर्ड से बाहर, राज्य सभा में नेता भी नहीं रहेंगे

सपा से निष्कासन के बाद रामगोपाल यादव अब सपा संसदीय बोर्ड से बाहर हो गए हैं। मुलायम ने उनकी जगह समाजवादी व्यापार सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र मोहन अग्रवाल को संसदीय बोर्ड में शामिल किया है। संभावना है कि राज्यसभा में सपा संसदीय दल का नेता बदलने का प्रस्ताव रखा जाएगा।

रामगोपाल की जगह किसी अन्य सांसद को नेता चुनने के लिए सपा मुखिया को अधिकृत किया जा सकता है। संभावना है कि बेनी प्रसाद वर्मा राज्यसभा में सपा के नेता हो सकते हैं। एक चर्चा यह है कि भविष्य में कार्यकारी अध्यक्ष का प्रावधान करने का जिम्मा भी राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपा जा सकता है।

ये हैं सपा संसदीय बोर्ड में
सपा संसदीय बोर्ड में अब मुलायम सिंह के अलावा आजम खां, किरनमय नंदा, अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह यादव, रवि प्रकाश शर्मा, एंटोनी और सुरेन्द्र मोहन अग्रवाल शामिल हैं। रविवार की बैठक में मां का निधन होने जाने के कारण रवि प्रकाश वर्मा और बीमार होने के कारण एंटोनी के आने की संभावना कम है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें