शाहजहांपुर के राममूर्ति सिंह वर्मा प्रदेश सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री हैं। कुछ दिन पहले ही उन पर बलात्कार का आरोप लगा था। उस आरोप से सरकार की किरकिरी हो ही रही थी कि शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जला देने की घटना से उनका नाम जुड़ गया।
अब इस हत्याकांड में राममूर्ति वर्मा मुख्य आरोपी हैं। जगेंद्र के घरवालों का आरोप है कि राममूर्ति के इशारे पर ही जगेंद्र को जिंदा जला दिया गया। जाहिर है मंत्री पर गंभीर आरोपों की वजह से सरकार की किरकिरी हो रही है।
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कैलाश चौरसिया
प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री कैलाश चौरसिया पर संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) से मारपीट करने का आरोप लगा है। विंध्याचल मंडल के आरटीओ चुन्नीलाल प्रजापति ने इस मामले में रिपोर्ट के लिए पुलिस को तहरीर भी दी है।
प्रजापति का आरोप है कि मंत्री के समर्थक एक क्लर्क दिनेश मालवीय को जॉइन न कराने का दबाव डाल रहे थे। पर, क्लर्क के पक्ष में हाईकोर्ट का स्टे होने के कारण उन्होंने बात नहीं मानी तो उनके साथ मारपीट की गई।
इन मंत्रियों ने भी गुंडई में एक-दूसरे को पीछे छोड़ा
राममूर्ति वर्मा पर केवल हत्या और बलात्कार के ही आरोप नहीं हैं। अभी कुछ दिन पहले तक वे वक्फ संपत्तियों को जबरिया कब्जा करने के आरोपों का सामना कर रहे थे। वैसे वर्मा अकेले मंत्री नहीं हैं जिसकी वजह से अखिलेश सरकार की साख पर सवाल उठ रहे हैं। अन्य कई मंत्री भी अखिलेश की मुश्किलें बढ़ाते नजर आ रहे हैं। सिर्फ मंत्री ही क्यों, दर्जाधारी लोग भी दबंगई दिखाकर सरकार के लिए समस्या खड़ी करने में पीछे नहीं रहे हैं।
वैसे तो गोंडा के रहने वाले और प्रदेश सरकार में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विनोद कुमार पंडित सिंह दबंगई और विवाद के पर्याय ही बन चुके हैं। सीएमओ को उठवा लेने की घटना को अंजाम दिला चुके पंडित सिंह का नाम हाल में ही आकाश अग्रवाल नाम के एक युवक को फोन पर गालियां देने और धमकी देने में आया।
हालांकि पंडित सिंह ने आरोपों को बेबुनियाद बताया। बावजूद इसके लोग यह मानने को तैयार नहीं कि वे ऐसा नहीं कर सकते। आकाश की गलती सिर्फ यह थी कि उसने पंडित सिंह की गाड़ी से काली फिल्म उतरवाने वाले समाचार की अखबार से फोटो खींचकर उसे फेसबुक पर लगा दिया था।
इससे पहले प्रदेश के खाद्य-रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया का नाम सीओ जियाउल हक हत्याकांड से जुड़ा। हालांकि जांच एजेंसियों की पड़ताल में वे आरोप मुक्त हो चुके हैं। मंत्री महबूब अली अमरोहा में 70 रुपये प्रति किलोग्राम गोश्त के भाव का फरमान देकर सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर चुके हैं।
वोट न मिलने पर बस्ती पर चलवा दिया बुल्डोजर
राज्यमंत्री रहते मनोज पारस पर कभी शिक्षक को पीटने का आरोप लगा तो कभी परिवहन विभाग के पीटीओ कौशलेंद्र ने पिटाई का आरोप लगाया। उन पर बलात्कार का भी आरोप लगा। हालांकि वे अब मंत्री नहीं हैं। सपा को बहुमत मिलते ही सबसे पहले विवाद में आए पार्टी के वरिष्ठ नेता व राजस्व मंत्री अंबिका चौधरी।
आरोप लगा कि उनके इशारे पर बलिया के एक गांव में उस बस्ती में बुलडोजर चलवाकर घर गिरा दिए गए जहां चौधरी को वोट नहीं मिले थे। इस विवाद ने तूल पकड़ा और उनके खिलाफ चुनाव जीते भाजपा के उपेंद्र तिवारी ने सड़क से लेकर सदन तक आरोप लगाए।
जंतु उद्यान मंत्री शिवप्रताप यादव पर समाज कल्याण विभाग के एक टेंडर को लेकर आरोप लगा। कहा गया कि मंत्री पद का दबाव डालकर उन्होंने टेंडर में हस्तक्षेप किया। मारपीट व और ठेका हथियाने के आरोप भी लगे।
दर्जाधारी भी करते रहे दबंगई : केसी पांडेय इस समय तो पद पर नहीं हैं। पर, गन्ना अनुसंधान परिषद के उपाध्यक्ष रहते उन्होंने भी सरकार के लिए मुसीबत खड़ी की। पद मिलने के 24 घंटे के भीतर ही उन पर पशु तस्करों को संरक्षण देने का आरोप लग गया।
सपा ने सरकार बनने के बाद नटवर गोयल से पार्टी के लोगों को दर्जा देने की शुरुआत की थी। सरकार ने उन्हें खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया। पर, जमीन कब्जाने व बिजली चोरी तथा पत्रकारों से मारपीट में इतना विवादित हो गए कि नटवर से लालबत्ती भी लेनी पड़ी और पार्टी से भी निकाले गए।
रायबरेली के बछरावां से सपा के विधायक रामलाल अकेला भी लालबत्ती और मंत्री पद को लेकर विवाद में आए और सरकार की किरकिरी कराई। अकेला को विधानसभा की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समिति का सभापति बनाया गया था।
पहले दिन से ही नसीहत: यह तब हो रहा है जब सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव सूबे में अखिलेश सरकार बनने के पहले ही दिन से सपाइयों को मर्यादा और अनुशासन में रहने की नसीहत देते चले आ रहे हैं। वे कई बार मंत्रियों की लालबत्ती वापस लेने की चेतावनी भी दे चुके हैं। पर, मंत्री हैं कि बाज नहीं आते।
वे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी कई बार यह समझा चुके हैं, ‘सावधान रहना अखिलेश! सरकार की छवि अच्छी होनी चाहिए। तुम्हारी (अखिलेश की) छवि तो जनता के बीच ठीक है लेकिन सहयोगियों की भी छवि ऐसी होनी चाहिए। बात तब बनेगी जब विधायकों और मंत्रियों ही नहीं हमारे किसी कार्यकर्ता के आचरण पर कोई अंगुली नहीं उठा पाए। जनता बहुत समझदार हो गई है, वह निराश होगी तो बहुत गलत होगा।’