राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी शुक्रवार को प्रत्याशियों का ऐलान कर सकती है। सपा संसदीय बोर्ड की बैठक दिल्ली में सुबह दस बजे पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव के अशोका रोड स्थित निवास पर बुलाई गई है। प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में सपा पार्टी के पुराने नेताओं और बाहरी दावेदारों के बीच फंसी हुई है।
राज्यसभा की जिन दस सीटों के लिए 20 नवंबर को मतदान होना है उनमें तीन सपा सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने पर खाली हो रही हैं। बदले हालात में सपा कम से कम छह सीट जीत सकती है।
दो सीटों पर बसपा, एक पर भाजपा और एक पर कांग्रेस-रालोद प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। सपा से टिकट पाने के लिए पार्टी के तमाम पुराने नेता सक्रिय हैं। जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सपा मुखिया प्रत्याशियों के चयन पर रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव के साथ चर्चा कर चुके हैं।
पार्टी के आधा दर्जन पुराने नेताओं के नामों को हरी झंडी दिए जाने की अटकलें हैं, हालांकि पार्टी में अभी भी मंथन का दौर जारी है।
मुलायम और राम गोपाल की राय अलग-अलग
प्रत्याशी चयन को लेकर अंतिम फैसला मुलायम सिंह यादव करेंगे लेकिन सपा नेतृत्व में इस बात पर अलग-अलग राय है कि राज्यसभा में किस तरह के लोगों को भेजा जाए। मुलायम सिंह भले ही निजी राय कुछ भी रखते हों लेकिन वह दूसरे नेताओं के साथ भी खुलकर चर्चा करते हैं। सहमत होने पर उनकी राय को अहमियत भी देते हैं।
प्रत्याशियों की घोषणा से पहले तक सात-आठ गंभीर दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं को हरी झंडी दिए जाने की बातें कही जा रही हैं लेकिन अभी फेरबदल की संभावनाएं बनी हुई हैं। पार्टी में मुलायम सिंह और रामगोपाल यादव उम्मीदवारों को लेकर अलग-अलग तरह की राय रखते हैं।
रामगोपाल चाहते हैं पुराने नेता जाएं राज्यसभा:
पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव और कुछ अन्य नेताओं की राय है कि राज्यसभा में पार्टी के पुराने और वफादार लोगों को भेजा जाए। बाहरी लोगों और दूसरे दलों के नेताओं की मदद से कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश नहीं जाएगा। 28 अक्तूबर को दिल्ली में मुलायम सिंह, रामगोपाल और अखिलेश यादव इसी समीकरण के आधार पर प्रत्याशी चयन को लेकर प्रारंभिक चर्चा कर चुके हैं।
यदि इस फॉर्मूले पर उम्मीदवार चुने गए तो रामगोपाल यादव के अलावा पूर्व मंत्री अशोक वाजपेयी, पूर्व सांसद नीरज शेखर, पूर्व सांसद चंद्रपाल सिंह यादव, पूर्व सांसद रवि प्रकाश वर्मा और संभल के पूर्व जिलाध्यक्ष जावेद अली खान के राज्यसभा जाने की संभावना बनती है।
मुलायम अजित, अमर, बेनी के पक्षधर भी
सपा मुखिया की राय है कि अजित सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा और अमर सिंह भी राज्यसभा पहुंचे। हालांकि पिछले दौर में इन नेताओं से उनके रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रहे लेकिन बदले सियासी हालात में वे इनकी मदद के इच्छुक हैं। अजित पहले कांग्रेस-रालोद गठबंधन से प्रत्याशी बनना चाहते थे लेकिन कांग्रेस से कपिल सिब्बल का नाम सामने आने के बाद रालोद की उम्मीदें सपा पर ही टिकी हैं।
रालोद की मेरठ रैली में शिवपाल सिंह यादव की शिरकत और सीएम अखिलेश यादव से जयंत चौधरी की मुलाकात के बाद रालोद-सपा की नजदीकियों से इन्कार नहीं किया जा रहा है।
ये भी हैं राज्यसभा के दावेदार:
पार्टी के पुराने नेताओं और दूसरे दलों के दिग्गजों के साथ ही मीडिया घराने और उद्योग जगत से जुड़े कुछ लोग भी सपा के सहारे राज्यसभा तक पहुंचने के लिए जोड़तोड़ में लगे। इनमें एक समाचार पत्र समूह के मालिक से लेकर दिग्गज पत्रकार तक शामिल हैं। पश्चिमी बंगाल के एक उद्योगपति भी सपा मुखिया से संपर्क बनाए हुए हैं।
मुलायम को कर सकते हैं अधिकृत
हालांकि संभावना है कि शुक्रवार को सपा उम्मीदवारों का ऐलान कर देगी लेकिन यह भी संभव है कि सपा संसदीय बोर्ड प्रत्याशियों के चयन के लिए मुलायम सिंह यादव को अधिकृत कर दे। यदि मुलायम को अधिकार सौंपा गया तो उम्मीदवारों के ऐलान में एक-दो दिन और लग सकते हैं।