क्या अमर सिंह फिर से राज्यसभा में पहुंचेंगे? बुधवार को दिल्ली में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से अमर सिंह की मुलाकात के बाद इसको लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
हालांकि सपा में अलग-अलग चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि अमर के लिए मुलायम का रुख मुलायम है लेकिन दूसरे नेता उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने के पक्षधर नहीं हैं।
राज्यसभा सदस्य के रूप में अमर सिंह का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। पिछली बार जब वह राज्यसभा सदस्य चुने गए थे, तब सपा में उनकी तूती बोलती थी।
वक्त ऐसा बदला कि वह अब सपा से बाहर हैं। लेकिन, जनेश्वर मिश्र पार्क के लोकार्पण समारोह में सपा मुखिया के साथ मंच शेयर करके उन्होंने सपा में वापसी की संभावनाओं को जिंदा कर दिया था। उन्होंने खुद को समाजवादी के बजाय मुलायमवादी बताया था।
इसके बाद भी वह सपा मुखिया से मिलने राजधानी पहुंचे थे। बुधवार को अमर सिंह ने दिल्ली में मुलायम सिंह यादव के निवास पर पहुंचकर उनसे करीब एक घंटा बातचीत की। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मौजूद थे।
खत्म नहीं हुईं अमर की संभावनाएं
राज्यसभा चुनाव के प्रत्याशियों को लेकर मंगलवार को मुलायम, रामगोपाल और अखिलेश यादव की बैठक के चंद घंटे बाद ही नेताजी से अमर सिंह की मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि दोनों नेताओ के बीच राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई। सपा नेताओं का कहना है कि अमर सिंह के प्रति नेताजी का सॉफ्ट कॉर्नर है लेकिन रामगोपाल यादव उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने के खिलाफ हैं। आजम खां भी अमर सिंह को कतई पसंद नहीं करते।
इसके बावजूद अमर सिंह की संभावनाएं अभी खत्म नहीं मानी जा रही है। सपा ने यूं तो राज्यसभा के लिए छह नामों को लगभग फाइनल कर दिया है लेकिन 31 अक्तूबर को संसदीय बोर्ड की बैठक तक इनमें बदलाव भी हो सकता है। अमर सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा रहा है।
अजित की राह हुई मुश्किल
अभी तक संभावना जताई जा रही थी कि अजित सिंह को राज्यसभा में भेजने के लिए कांग्रेस से हरी झंडी मिल सकती है। कांग्रेस और रालोद राज्यसभा की एक सीट जीत सकते हैं। कांग्रेस अब इस सीट पर खुद दावेदारी जता रही है।
कांग्रेस से कपिल सिब्बल का नाम सामने आ रहा है। सपा भी अजित सिंह की राज्यसभा में एंट्री कराने के बजाय अपनी पार्टी के पुराने नेताओं को तवज्जो देने के पक्ष में हैं।
ऐसे में संसद पहुंचने की अजित की उम्मीदों को झटका लगता दिख रहा है।