प्रजेंटेशन के बाद अखिलेश ने भाजपा को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। कहा कि भाजपा भाईचारा तोड़ने, विकास के मुद्दे से ध्यान भटकाने के साथ ही सांप्रदायिकता की आड़ में वोटों के ध्रुवीकरण की साजिश करती है।
उन्होंने भाजपा से समझदारी के साथ सावधान रहने और अपनी भाषा तथा व्यवहार में संयम बरतने की सलाह दी। कहा, भाजपा समाज में कांटे बोती जा रही है तो अमन की खेती कैसे होगी? सपा-बसपा में गठबंधन हुआ तो भाजपा बौखला गई। विपक्ष की जानवरों से तुलना होने लगी। यह राजनीति में नैतिक मूल्यों की गिरावट का उदाहरण है।