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हाशिम के घर क्यों गए सपाई, धमकाने या मनाने?

Fri, 05 Dec 2014 01:26 PM IST
विशाल गुप्त/अनुराग शुक्ल/अमर उजाला, अयोध्या
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बाबरी मुकदमे के मुद्दई हाशिम अंसारी को समाजवादी पार्टी के नेता अब घेरने लगे हैं। बृहस्पतिवार को दिनभर उनके आवास पर हलचल रही।
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सपा जिलाध्यक्ष जयशंकर पांडेय व नगर विधायक तेज नारायण पांडेय पवन उनसे मिलने पहुंचे। पहुंचते ही तेज नारायण पाण्डेय ने उनसे कहा,‘चाचा मोदी की बात न बोला करो। कह दिया करो हमें कुछ नहीं बोलना है।’

हाशिम के घर पहुंचते ही पवन ने उनका पैर सहलाते हुए कहा कि चाचा पैर टूटा बताया क्यों नहीं, आज पता चला पैर कै बारे मा। अभी जवान हो बूढ़ा ना ही हो। इसी दौरान हाशिम अंसारी ने पास बैठे सपा जिलाध्यक्ष जयशंकर पांडेय के कान में कहा कि इकै (पवन) लाल बत्ती काहे गई बोलौ।
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जवाब में जयशंकर ने कहा कि मिल कै बात करित है। इस पर हाशिम भावुक हो कहते हैं कि हमरे फैजाबाद की नाक काट लिए, तब तक कमरे का दरवाजा बंद हो जाता है और मीडिया कर्मियों से बाहर जाने को कह एकांत वार्ता शुरू हो जाती है।

हालांकि, आजम खां ने नौकरी पर नहीं दिया जवाब

दरवाजा बंद होते ही पवन पांडेय हाशिम से कहते हैं कि चाचा चुप रहो बहुत होय गवा। इस पर चाचा जयशंकर पांडेय की ओर मुखातिब हो कहते हैं कि सोच लेव ना ही तव बवाल कर देब। हम सरकार के विरोध में कुछ ना ही बोलब।

इसी दौरान पवन ने उनके लड़के इकबाल को किनारे ले जाकर कान में कुछ बातें की। पवन ने कहा आपके पोते की बात कर लिया है।

इस बातचीत पर हाशिम के पुत्र इकबाल से पूछा गया तो इकबाल का कहना था कि उनका 22 वर्षीय पुत्र एखलाक अंसारी एमए कर रहा है। हम लोगों ने पहले भी आजम खां से नौकरी के लिए संदेश भिजवाया था लेकिन जवाब नहीं मिला।
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प्रधानमंत्री मोदी से करेंगे बातचीत

बाबरी मस्जिद के मुद्दई मो. हाशिम अंसारी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के लिए विशेष पीठ बने और इसकी सुनवाई रोजाना हो। जितनी जल्दी हो सके इस मुद्दे का हल निकाला जाए। संसद में भी बहस हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आएं तो उनसे बात करूंगा।

हाशिम ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट नहीं जाना चाहते थे। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के लोग बैठकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास के यहां बात कर सकते थे, लेकिन विश्व हिंदू परिषद सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में दस साल लग जाएंगे।

जो लोग राजनीति कर रहे हैं वो इकट्ठा हों और स्पेशल बेंच बनवाएं, जिससे विवाद की प्रतिदिन सुनवाई हो और दो-चार महीने में फैसला हो जाए। जो भी फैसला होगा मान लेंगे।

ये मामला अब बहुत पेंचीदा हो गया है। यही वजह थी कि श्रीराम जन्मभूमि न्यास के पूर्व कार्याध्यक्ष स्व. रामचंद्र दास परमहंस ने भी अपना मुकदमा वापस ले लिया था। हाशिम बोले, वह भी चाहते हैं कि मस्जिद बने लेकिन मसले का समाधान भी होना चाहिए।
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