यूपी सुन्नी कौंसिल के संरक्षक आबिद रजा खां लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि फिरकापरस्त ताकतों को रोकने और सेक्युलर ताकतों को मजबूती देने के लिए वे सपा की हिमायत कर रहे हैं।
जबकि करीब चार महीने तक राज्य एकीकरण परिषद का सलाहकार (राज्य मंत्री दर्जा) रहने के बाद खां ने सपा सरकार पर मुस्लिम हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
राजधानी में सपा मुख्यालय पर मीडिया से बातचीत में खां ने बताया कि सुन्नी कौंसिल के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों पर ठोस कार्यवाही का भरोसा दिलाया। इसके बाद सुन्नी कौंसिल ने लोकसभा चुनावों में सपा को समर्थन की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि मुस्लिमों की शिक्षा और रोजगार से ज्यादा अहम मुद्दा मुल्क की सलामती है। मुल्क सलामत रहेगा तभी तरक्की और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं।
इस समय फिरकापरस्ती एक चुनौती है। इससे सपा लड़ सकती है। इसी कारण लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशियों को समर्थन देने का फैसला किया गया है।
इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खां के बसपा का समर्थन करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह उनका आदर करते हैं।
उनकी मौलाना तौकीर से कोई सियासी गुफ्तगू नहीं हुई है। लोकतंत्र में सभी को अपनी राय जाहिर करने का हक है।
उनके साथ सुन्नी कौंसिल के महासचिव मौलाना तारिक जमील, मुफ्ती अयूब, मौलाना फारूख, मौलाना शमीम, नादिर इलाहाबादी और अफजाल गाजीपुर थे। मंत्री पद से इस्तीफा दिया, सपा नहीं छोड़ी थी
आबिद रजा ने कहा कि उन्होंने राज्यमंत्री के ओहदे से इस्तीफा दिया था लेकिन सपा नहीं छोड़ी थी।
अब वे सपा प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पूरे प्रदेश का दौरा करेंगे। उनकी कोशिश है कि मुस्लिम वोटों का बंटवारा न हो।