14वें वित्त के बजट से करीब 114 करोड़ रुपए की लागत से कराए जाने वाले विकास कार्यों में सांसदों और विधायकों के काम शामिल किए जाने को लेकर सोमवार को नगर निगम सदन से लेकर महापौर के आफिस तक भारी बवाल हुआ।
सपा पार्षद दल नेता की विधायकों को लेकर आपत्ति पर भाजपा पार्षद भड़के गए। दोनों ओर से हंगामा हुआ। इसी बीच भाजपा षार्षदों के प्रस्ताव पर महापौर ने बजट को पास कर दिया और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। उससे विवाद और भड़क गया।
सत्तापक्ष पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए सपा और कांग्रेस के पार्षद सदन के अंदर धरना पर बैठ गए। महापौर मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे और बजट की प्रतियां फाड़ कर फेंक दी। सदन में अध्यक्ष (महापौर) के मेज पर रखे पानी पीने के लिए रखे कांच के गिलास तोड़ डाले।
सदन में हंगामा बढ़ने पर महापौर भाजपा पार्षदों के साथ सदन से बाहर निकलकर अपने आफिस में चली गईं। करीब 10 मिनट तक सदन मे ही ‘महापौर संयुक्ता भाटिया मुर्दाबाद’ के नारे लगाने के बाद सपा और कांग्रेस पार्षद हंगामा करते हुए महापौर अफिस के बाहर पहुंच गए।
यहां पर कमरे के सामने मोहम्मद सलीम, शैलेंद्र सिंह बल्लू, अमिता सिंह, ममता चौधरी, राजकुमार सिंह राजा सहित करीब दो दर्जन पार्षद धरना पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ पार्षद मेयर के कमरे में जाने लगे तो सुरक्षा कर्मी ने उनका रोकने का प्रयास किया तो पार्षद और भड़क गए।
वहीं आफिस के बाहर धरना प्रदर्शन से नाराज भाजपा पार्षदों ने भी पहले तो महापौर के आफिस के अंदर से नारेबाजी की और फिर उसके बाद कमरे से बाहर आकर करने लगे। इससे दोनों पक्ष आमने -सामने आ गए। स्थिति यह हो गई दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की, हाथापाई की नौबत दिखने लगी।
एक तरफ सपा और कांग्रेस के पार्षद महापौर मुर्दाबाद तो दूसरी ओर भाजपा पार्षद महापौर जिंदाबाद और जय श्रीराम के नारे जोर-जोर से लगने लगे। इससे तनाव बढ़ता देख भाजपा और सपा के कुछ वरिष्ठ पार्षदों के साथ ही नगर निगम के एक कर्मचारी नेता सत्येंद्र सिंह ने भी पार्षदों के बीच आकर दोनों पक्षों को समझाया। उसके बाद विवाद शांत हुआ।