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‘डायरेक्टर बाय मिस्टेक’ में इम्तियाज अली ने खोले दिल के राज, कहा- नाकामयाबी से दिखी उम्मीद

Mon, 19 Nov 2018 04:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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इम्तियाज अली - फोटो : amar ujala
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मैने विज्ञापन का कोर्स किया था और मैं इसी फील्ड में नौकरी की तलाश में था। उस समय मुझे जॉब की जरूरत भी थी। हैरत की बात थी कि अपने बैच में सबसे ज्यादा टैलेंटेड माना जाता था लेकिन उसके बावजूद सबको जॉब मिल गई थी सिवा मेरे। करीब नौ माह तक नौकरी ढूंढने के बाद मैंने एक टेलीविजन चैनल में नौकरी शुरू की। उसके बाद मैं कुछ माह के भीतर ही डायरेक्टर बन गया।

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लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन रविवार को ‘डायरेक्टर बाय मिस्टेक’ में मशहूर फिल्म डायरेक्टर, प्रोड्युसर व राइटर इम्तियाज अली ने अपने शुरूआती दौर से डायरेक्टर बनने तक के सफर को साझा किया।

कहा कि जब मैंने थिएटर जॉइन किया तो शुरूआत में ऐसा लगता था जैसे मैं थिएटर वाला हूं ही नहीं। उसके बाद तो मैं जहां नाकामयाब हुआ वहीं से मुझको उजाला नजर आने लगा। मैं अपनी फिल्मों का आइडिया सामान्य व्यक्ति के जीवन से लेता हूं।
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समझ नहीं आती थीं टीचर्स की बातें
इम्तियाज ने कहा जब मैं पढ़ाई करता था तब टीचर क्या पढ़ा रहे हैं यह मैं बहुत अच्छे से सुनता जरूर था लेकिन कुछ भी दिमाग में नहीं जाता था। क्योंकि मेरे दिल में कुछ चलता था। आज मैं वही चीजें अपनी फिल्मों के जरिए दिखाता हूं। अगर मेरी कोई फिल्म फ्लॉप होती है तो मुझे मायूसी नहीं होती। वो मेरी नाकामयाबी नहीं होती, मैं उसे सामान्य तौर पर ही लेता हूं।

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समझ नहीं आती थीं टीचर्स की बातें

इम्तियाज ने कहा जब मैं पढ़ाई करता था तब टीचर क्या पढ़ा रहे हैं यह मैं बहुत अच्छे से सुनता जरूर था लेकिन कुछ भी दिमाग में नहीं जाता था। क्योंकि मेरे दिल में कुछ चलता था। आज मैं वही चीजें अपनी फिल्मों के जरिए दिखाता हूं। अगर मेरी कोई फिल्म फ्लॉप होती है तो मुझे मायूसी नहीं होती। वो मेरी नाकामयाबी नहीं होती, मैं उसे सामान्य तौर पर ही लेता हूं।
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खुद का प्रोड्क्शन हाउस खोलने की तैयारी

इम्तियाज अली ने बताया कि डायरेक्टर एक मजदूर की तरह होता है जिसे अपनी हर फिल्म के लिए शुरूआत से उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है। अब तक बतौर निर्माता मैने सिर्फ हाइवे मूवी दी है। जल्द ही मैं अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस खोलने की तैयारी में हूं। मैंने 7-8 स्टोरी लिखकर तैयार कर ली हैं। उम्मीद है इसमें से किसी की शूटिंग फरवरी-मार्च से शुरू हो जाए। इस मौके पर उन्होंने अपने बचपन से जुड़े किस्से और अपनी मां व शायर दोस्त इरशाद कामिल के किस्से भी सुनाए।
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