लोकसभा उपचुनाव में एक साथ आए सपा और बसपा का भाईचारा अब विधान परिषद में भी दिखने लगा है। कांग्रेस सदस्यों का भी बीच-बीच में उनका साथ देना भविष्य की रणनीति की ओर साफ इशारा कर रहा है। राजनीति के माहिरों का कहना है कि सदन में यह सब यूं ही नहीं दिख रहा है, इसके गहरे निहितार्थ हैं।
सोमवार को बसपा सदस्य दिनेश चंद्रा के कथित विशेषाधिकार हनन के मामले को जिस तरह से सपा सदस्यों का समर्थन मिला, उसे गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में बसपा के सपा को समर्थन से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सदन में दिनेश चंद्रा के मामले को बसपा सदस्यों से ज्यादा मुखर ढंग से सपा सदस्यों ने रखा। इतना ही नहीं विशेषाधिकार हनन के नियम 223 के तहत यह प्रस्ताव सपा के ही सदस्य लाए।
नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा इस मामले में संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच के बाद कठोर कार्रवाई की बात बार-बार कहते रहे, पर सपा और बसपा के सदस्य उस अधिकारी को सदन में तलब करने पर अंत तक अड़े रहे।
कांग्रेस के दोनों सदस्यों ने भी पूरी दिलचस्पी दिखाते हुए दिनेश चंद्रा के पक्ष को जायज ठहराया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में सदन के भीतर भी सपा व बसपा के बीच के फासले और भी कम होते दिखें तो कोई ताज्जुब की बात नहीं होगी।