संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। जिले में किसान धान की नर्सरी डालने से पहले बीज का शोधन कर उसकी बोआई करें। जिससे फसल निरोगी होने के साथ पैदावार अच्छी मिल सके। यह बातें सोमवार को किसानों के नाम जारी अपील में जिला कृषि अधिकारी अनिल प्रसाद मिश्रा ने कहीं। उन्होंने बताया कि 25 मई से 24 जून तक बीज शोधन अभियान चलाया जा रहा है। किसान बोआई से पहले बीज शोधन व भूमि शोधन करें। इससे फसल निरोगी होने के साथ ही पैदावार भी अच्छी मिलेगी।
प्रतिवर्ष किसानों को खरपतवार व कीटों के प्रभाव से फसलों में 15 से 20 प्रतिशत नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार फसलों में लगने वाले रोग से पूरी फसल नष्ट होने का खतरा बना रहता है। बीज शोधन से फसलों में लगने वाले रोगों से बचाव किया जा सकता है। भूमि व बीज शोधन के लिए सभी जरूरी रसायन ब्लाॅक स्तर पर संचालित राजकीय कृषि रक्षा इकाई में 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध है।
ऐसे करें बीज शोधन
धान के बीजों को जीवाणु व झुलसा रोग से बचाने के लिए स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत, टेटासाइक्लीन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत चार ग्राम प्रति 25 किलोग्राम बीज को 10 लीटर पानी में मिलाकर रात भर भिगोना है। दूसरे दिन बीज को छानकर छाया में सुखाने के बाद कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत, डब्लू पी दो ग्राम प्रति किलोग्राम से बीज शोधन कर प्रयोग करना चाहिए। वहीं दलहनी फसलों के बीजों को प्रति एक किलोग्राम में ट्राइकोडर्मा चार ग्राम से शोधित करके बोआई करनी चाहिए।
ऐसे करें भूमि शोधन
भूमि शोधन के लिए टाइकोडर्मा ढाई से तीन किलोग्राम 50 से 60 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर छाया में रखें। अंतिम जुताई के समय इसका छिड़काव खेत में कर दें। जिससे भूमि जनित रोगों से निजात मिल सके।