कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा को लोकसभा चुनाव में पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। बावजूद इसके लोकसभा चुनाव में पार्टी यूपी मे बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई। एक दिवसीय दौरे पर यहां पहुंची प्रियंका ने भुएमऊ गेस्ट हाउस में हार के कारणों की समीक्षा की। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के करीब 40 जिलों बहराइच, सुल्तानपुर, उन्नाव, भदोही, मिर्जापुर आदि जिलों के पार्टी के हारे प्रत्याशी और जिलाध्यक्षों ने भाग लिया।
सुल्तानपुर से पार्टी के प्रत्याशी रहे डॉ. संजय सिंह, उन्नाव से अनु टंडन और बहराइच की प्रत्याशी रही सावित्री बाई फुले समेत अन्य प्रत्याशियों ने बारी-बारी से हार की वजह प्रियंका के सामने रखी। उन्होंने पूछा कि क्या संगठन का साथ नहीं मिला। जनता ने कांग्रेस के बजाय भाजपा का सपोर्ट क्यों किया। क्या मुद्दे रहे। मायावती और अखिलेश यादव के गठबंधन से पार्टी पर क्या फर्क पड़ा। सभी ने इन मुद्दों पर अपनी बात भी रखी।
प्रियंका ने यह कहते हुए सभी का हौसला आफजाई किया कि अब सब हार से निराश न हों। आने वाले चुनावों की तैयारी करें। खासकर यूपी में 2022 में होने वाले चुनाव के लिए तैयारी अभी से शुरू करें। उन्होंने यूपी का आगामी विस चुनाव बिना गठबंधन के लड़ने के ही संकेत दिए।
हारे प्रत्याशियों और जिलाध्यक्षों की समीक्षा बैठक के दौरान सांसद सोनिया गांधी भी मौजूद रहीं। उन्होंने प्रत्याशियों और जिलाध्यक्षों की ओर से हार की बताई गई वजह को सुना। प्रियंका ने जो भी कुछ कहा, उस पर हां में हां मिलाई। इस दौरान सोनिया ने सभी से नये सिरे से पार्टी की खोई जमीन को मजबूत करने का आह्वान भी किया।
सभी ने जताई सहमति न हो गठबंधन : संजय सिंह
सुल्तानपुर के कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी रहे डॉ. संजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हम सबने चुनाव में आई दुश्वारियों और अनुभवों को पार्टी नेतृत्व को बताया है। नेतृत्व ने उसे बड़ी गंभीरता से लिया है। आने वाले समय में सबकी राय है कि गठबंधन नहीं होना चाहिए। यूपी में 2022 में होने वाले चुनाव में हम सरकार बनाएंगे, ऐसा हम सबका आत्मविश्वास है। लोकसभा चुनाव में हार के क्या कारण रहे, इस पर संजय सिंह ने कहा कि यह हम बाद में बताएंगे, जब सब तय हो जाएगा कि हम क्या करने वाले हैं।