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जनता से सीधा संवाद अच्छी पुलिसिंग का सबसे बेहतर तरीका : मोहसिन रजा

Thu, 13 Jun 2019 01:01 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मंत्री मोहसिन रजा - फोटो : amar ujala
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अच्छी पुलिसिंग का सबसे बेहतर तरीका जनता से सीधा संवाद है और संवाद हीनता ही कई विवादों को जन्म देती है। ये बातें बुधवार को पुलिस मुख्यालय के नवनिर्मित भवन में हुए सेमिनार में प्रदेश भर के पुलिस कप्तानों को संबोधित करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री मोहसिन रजा ने कहीं। 
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उन्होंने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मामले में कहा कि पुलिस को किसी एक मौलवी या व्यक्ति पर निर्भर रहने के बजाए समुदाय के संभ्रांत लोगों से संपर्क रखना चाहिए। इस दौरान चार सत्रों में हुई सेमिनार को पूर्व डीजीपी बृज लाल, सुलखान सिंह और पत्रकार सुनीता एरन ने संबोधित किया।   

पुलिस में आंतरिक भ्रष्टाचार पर डीजीपी सुलखान सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए कोई नरम विकल्प नहीं है, इसके लिए कठोर बनना पड़ेगा। इस विभाग के लिये परसेप्शन बहुत महत्वपूर्ण है। भ्रष्टाचार का बड़ा कारण समय से एफआईआर दर्ज न करना होता है। उन्होंने एक समान रूप से स्थानांतरण नीति लागू करने की बात कही। कहा कि एफआईआर दर्ज करने में पेरशान न हों। विस्तृत जांच कराइए और निगरानी कीजिए, भ्रष्टाचार की जड़ आपको नजर आने लगेगी। 
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एससीएसटी अपराधों के संबंध में पूर्व डीजीपी बृज लाल ने कहा कि सरकार द्वारा आर्थिक सहायता के प्राविधान के अनुपालन में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसी घटनाओं में पूरी संवेदनशीलता बरती जाए।

महिला सुरक्षा पर वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरन ने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित शिकायत दर्ज कर पीड़ित को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं करना चाहिए। महिला संबंधी अपराध रोकने वाले पुलिस कर्मियों को पुरस्कृत करने का प्राविधान हो। महिला संबंधी अपराधों को रोकने के लिये ग्राम प्रधान, सेवानिवृत्त अधिकारी को जागरूक कर सहयोग लें। ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्पलाइन नंबरों को और अधिक सक्रिय एवं सुनसान स्थानों पर प्रकाश का प्रबंध करना चाहिए। 

छोटी-छोटी गलतियां पड़ती है भारी : डीजीपी
डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि महिला संबंधी अपराधों में अभियोग दर्ज कर तत्काल मौके पर पहुंचें। जिलों में अच्छे थानाध्यक्षों का चयन करें। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में छोटी-छोटी गलतियां भी कई बार भारी पड़ जाती हैं। शिकायती प्रार्थना पत्रों में न्यायोचित कार्रवाई करें। अधिकारियों और कर्मचारियों को संवेदनशील होना चाहिए।
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