लखनऊ। जननी सुरक्षा योजना के तहत सीएचसी में भर्ती होने वाली प्रसूताओं को हर दिन पौष्टिक खाना-नाश्ता देने का नियम है, मगर इसमें कुछ सीएचसी में गर्भवती को नाश्ता मिल रहा है तो किसी सीएचसी में खाने की अधूरी थाली ही मिल रही है। खाने से पौष्टिक आहार व फल गायब है। तीमारदारों को खाना घर से लाना पड़ रहा है। इसे लेकर तीन सीएचसी की जांच की गई तो सच सामने आया।
रेडक्रॉस सीएचसी
कैसरबाग स्थित रेडक्रॉस सीएचसी में हर दिन एक या दो डिलीवरी होती है। प्रसूताओं को यहां सुबह-शाम का नाश्ता तो मिल रहा है, मगर खाना तीमारदारों को घर से लाना पड़ रहा है। सीएचसी में बृहस्पतिवार को अंजलि की डिलीवरी हुई थी। परिजनों ने बताया कि सुबह-शाम 10 रुपये वाला दूध व ब्रेड ही मिल रहा है। सीएचसी प्रभारी डॉ. रितेश द्विवेदी ने बताया कि सीएचसी में अपने स्तर से व्यवस्था कराई जा रही है। वेंडर का अनुबंध इस सीएचसी से नहीं है।
एनके रोड सीएचसी
एनके रोड सीएचसी में भर्ती होने वाली प्रसूता को नाश्ते में एक वक्त दूध, ब्रेड मिल रहा है, जबकि दिन-रात के वक्त खाना दिया जा रहा है। यहां भी टेंडर के तहत अनुबंध नहीं है। सीएचसी प्रभारी ने अपने स्तर से एक संस्था से अनुबंध किया है। वहीं से टिफिन में खाने की आपूर्ति होती है, मगर खाने में पौष्टिक आहर नहीं होता। तीमारदारों ने बताया दो वक्त का खाना व नाश्ता मिल रहा है। सीएचसी प्रभारी डॉ. वाईके सिंह ने बताया कि प्रसूताओं को खाना संग नाश्ता दिया जा रहा है।
अलीगंज सीएचसी
अलीगंज सीएचसी में टेंडर के तहत प्रसूता को खाना मिल रहा है। निजी कंपनी को खाने-नाश्ते के लिए हर दिन एनएचएम के जरिये 135 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। निजी कंपनी सीएचसी परिसर में ही खाना बनवाता है, मगर इस खाने से पौष्टिक आहार गायब है। फल, दलिया व अंडा तक गर्भवती को नहीं दिया जा रहा। सुबह नाश्ते में सिर्फ 10 रुपये का दूध का पैकेट व चार ब्रेड थमाई जा रही है। मक्खन भी नहीं मिल रहा है।
यह है डाइट चार्ट
सुबह सात बजे नाश्ते में बंद मक्खन, दूध, अंडा या दही और फल। लंच में 12:30 बजे एक दाल, मौसमी सब्जी, चावल और दो फल और साढ़े सात बजे डिनर में दाल, रोटी और सब्जी दी जाएगी।