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...तो वोट नहीं डाल पाएंगे नामित पार्षद

Mon, 23 Sep 2013 10:48 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में नामित पार्षद वोट दे पाएंगे या नहीं यह स्पष्ट नहीं है।
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दरअसल मताधिकार का यह मामला तीन साल पहले आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले और नगर निगम अधिनियम के बीच उलझ सकता है। फिलहाल स्थिति स्पष्ट न होने के कारण चुनाव के दौरान विवाद के आसार नजर आ रहे हैं।
नामित पार्षद वोट देंगे या नही इस पर महापौर व पार्षद अभी खुलकर कुछ बोल नहीं रहे हैं। हालांकि कोर्ट के आदेश के आधार पर नामित पार्षदों को वोट देने से रोकने की तैयारी है।
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सपा पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू का कहना है कि नगर निगम अधिनिमय में जो व्यवस्था है, उसके तहत नामित पार्षदों को वोट देने का अधिकार है।

महापौर ने उनसे कहा है कि कोर्ट ने नामित को वोट देने पर रोक लगाई है पर वह उसका आदेश नहीं उपलब्ध करा पाए हैं। यदि हाईकोर्ट का कोई आदेश है तो उसके तहत नगर निगम अधिनियम में संशोधन किया जाना चाहिए था।

यह भी जानकारी में आया है कि जो ऑर्डर था वह इलाहाबाद के लिए ही था। जब वह लखनऊ को लेकर था नहीं तो अब उसका यहां से क्या मतलब। भाजपा पार्षद दल केनेता रमेश कपूर बाबा इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहते हैं।

इससे इतर जानकार कहते हैं कि जब तक नगर निगम अधिनिमय में संशोधन नहीं किया जाता तब तक नामित वोट दे सकते हैं। आदेश की प्रति हो तभी रोक लगाई जा सकती है।
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हालांकि उनका यह भी कहना है कि जिस समय ऑर्डर आया था, उसी समय संशोधन हो जाता तो विवाद की स्थिति न बनती।
बीती नौ सितंबर को 12 सदस्यीय नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्य लाटरी डालकर रिटायर किए गए थे। खाली हुए स्थान पर जिन छह सदस्यों का चुनाव होना है, उनके लिए जोड़-तोड़ शुरू हुई है। जब पहली कार्यकारिणी चुनी गई थी तब नामित पार्षद नहीं थे।
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