राजधानी लखनऊ में सोमवार को लगी आग में किसी की गृहस्थी जल गई तो किसी के अरमान खाक हो गए। घटना के दूसरे दिन यानी मंगलवार को फैजुल्लागंज के शिव विहार कॉलोनी का दृश्य देख लोगों के दिल दहल उठे। यहां पीड़ित परिवार के लोग राख के ढेर में थोड़ी बहुत बची हुई जमापूंजी और जेवर ढूंढते दिखे।
सुबह 11: 45 बजे प्लाट के पास बैठी रो रही एक महिला दिखी। बात करने पर उसने अपना नाम नीलोफर बताया। रोने का कारण पूछने पर उन्होंने रुंधे गले से बताया कि पति कबाड़ का काम करते है। बेटी की उम्र शादी लायक हो गई थी। पति ने खून-पसीने की कमाई से एक-एक पाई जोड़कर बेटी की शादी के लिए कुछ रकम व 60 हजार के जेवर बनवाए थे। कई सारे अरमान थे, मगर आग में जेवर के साथ वह भी जलकर राख हो गए।
थोड़ा आगे बढ़ने पर दोपहर 12:15 बजे दो भाई सगे भाई इब्राहिम अली और असगर अली अपनी किताबें खोज रहे थे। तभी उनकी नजर तीन से चार किताबों पर पढ़ीं। इनमें से कुछ अधजली थीं तो कुछ सही थीं। बात करने पर बच्चों ने बताया कि पिता ने कुछ माह पहले ही स्कूल में दाखिला कराया था। मगर आग से यूनिफॉर्म , बैग और रुपये सब जल गए। अब वह स्कूल नहीं जा सकेंगे।
घटना के अगले दिन सपा नेता पूजा शुक्ला, समाज सेविका ममता त्रिपाठी व अन्य लोग पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आए। उन्होंने खाने-पीने के साथ ही छांव और आराम के लिए टेंट भी लगवाए। इसके साथ ही हर संभव मदद करने का आश्वासन भी दिया।
झोपड़ियों में आग लगने पर प्लॉट से सटे हरिराम के मकान को काफी नुकसान पहुंचा था। उनके सोलर पैनल क्षतिग्रस्त हो गए थे। साथ ही दीवारों में भी दरारें आ गई थी। इसी तरह सत्य प्रकाश और विपिन मिश्रा को भी काफी आर्थिक क्षति हुई। हरिराम ने बताया कि वह और अन्य लोग जल्द ही संयुक्त रूप से डीएम और नगर आयुक्त को शिकायती पत्र देंगे। उन्होंने जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।