एक्युट-ऑन-क्रॉनिक लिवर फेल्योर बीमारी केवल वायरस, संक्रमण या शराब के सेवन से ही नहीं होती। इस गंभीर बीमारी के लिए दवाएं भी जिम्मेदार हैं। अधिक दवाओं के सेवन से होने वाले लिवर फेल्योर में 90 दिनों के भीतर मरीज की मौत भी हो सकती है। दवाओं के द्वारा होने वाले लिवर फेल्योर की संख्या देश और एशियन क्षेत्र में सबसे ज्यादा है।
यह तथ्य सामने आए हैं संजय गांधी पीजीआई व विश्व के अन्य चिकित्सा संस्थानों द्वारा किए गए शोध में। शोध में पाया गया कि ड्रग इंड्यूज्ड एक्यूट-ऑन-क्रॉनिक लिवर फेल्योर में संक्रमण, शराब व एल्कोहल के द्वारा हुए लिवर फेल्योर के मुकाबले मौत की आशंका काफी पहले और अधिक पाई गई।
इस शोध में लिवर फेल्योर के 3132 मरीजों को शामिल किया गया, जिसमें पुरुषों की संख्या करीब 65 प्रतिशत थी। इनमें से 329 मरीजाें में लिवर फेल होने का कारण दवाओं का सेवन था, वहीं 2803 मरीजों में कारण दवाओं का सेवन नहीं था। शोध में पाया गया कि दवाओं से लिवर फेल होने वाले मरीजों की मौत 90 दिनों के भीतर हो गई। वहीं नॉन-ड्रग लिवर फेल्योर में इसकी तुलना में मोरटैलिटी कम पाई गई।