भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी की प्रदेश टीम के नेताओं के मंसूबे ध्वस्त कर दिए। टीम के तमाम लोग नई राष्ट्रीय टीम में अपनी-अपनी जगह तलाश रहे थे। कुछ तो पूरी तरह आश्वस्त थे।
इसके लिए अलग-अलग तर्क और अमित शाह से नजदीकी की बात कही जा रही थी, पर सब बेकार हो गया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की पदाधिकारियों की टुकड़ी का कोई सिपाही शाह की टीम में जगह नहीं पा सका।
उल्टे जिन चेहरों को यूपी से राष्ट्रीय टीम में पदाधिकारी बनाया गया, उससे यूपी के मौजूदा पदाधिकारियों के लिए नसीहत व चेतावनी के सुर अलग निकल रहे हैं।
ये सुर बता रहे हैं कि राष्ट्रीय नेतृत्व की कसौटी पर वे खरे नहीं उतरे हैं। शाह के टीम घोषित करने के साथ ही यह भी साफ हो गया है कि टीम के गठन में राजनाथ सिंह की भी चली है।
वरुण को नहीं मिली टीम में जगह
शाह की टीम में भी रामलाल राष्ट्रीय महामंत्री संगठन हैं। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर प्रदेश में पश्चिम क्षेत्र में लंबे समय तक क्षेत्र प्रचारक रहे शिवप्रकाश को शाह की टीम में संयुक्त महामंत्री संगठन बनाया गया है। पर, ये दोनों ही पद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोटे के हैं।
बाकी पदाधिकारियों के आधार पर तुलना करें तो शाह ने अपनी टीम में यूपी का कोटा यथावत रखा है। राजनाथ सिंह की टीम में यूपी से 10 पदाधिकारी थे। शाह की टीम में भी यूपी का यह प्रतिनिधित्व बरकरार रखा गया गया है।
हालांकि राष्ट्रीय महामंत्री वरुण गांधी और राष्ट्रीय मंत्री विनोद पांडेय नई टीम से बाहर हो गए हैं। वरुण की जगह आगरा से सांसद रामशंकर कठेरिया को महामंत्री बनाया गया है।
इन्हें अमित शाह ने दी प्रमुखता
राजनाथ की टीम में यूपी के पास राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के चार पद थे। शाह की टीम में तीन पद मिले हैं। इनमें मुख्तार अब्बास नकवी व सत्यपाल मलिक को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है।
डॉ. दिनेश शर्मा के रूप में नए चेहरे को जगह दी गई है। राजनाथ की टीम में यूपी के हिस्से में सिर्फ एक राष्ट्रीय मंत्री का पद विनोद पांडेय के रूप में था।
नई टीम में तीन लोगों अरुण सिंह, सिद्धार्थनाथ सिंह और पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी श्रीकांत शर्मा को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है।
राजनाथ की टीम में यूपी से दो प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी और विजय सोनकर शास्त्री शाह की टीम में बने रहे हैं।
कई नेताओं को दिया कड़ा संदेश
लोकसभा चुनाव नतीजे आने के बाद से प्रदेश भाजपा के कई पदाधिकारी लगातार दिल्ली जाने की पैरवी में जुटे थे। कोई शाह से नजदीकी का तर्क देकर अपना भाव बढ़ा रहा था तो किसी को अपनी दौड़भाग पर भरोसा था। कई लोग तो पिछले दो महीने में दिल्ली के कई चक्कर भी लगा आए थे।
कुछ वरिष्ठ नेता भी शाह की टीम में जगह पाने का सपना देख रहे थे। इन्हें उम्मीद थी कि पार्टी के अच्छे दिन आने के बाद शायद उनके भी अच्छे दिनों की वापसी हो जाए। पर, ऐसा नहीं हुआ।
उल्टे वरुण गांधी की टीम से विदाई से यह संदेश निकलता जरूर दिख रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व और भगवा रणनीतिकार यूपी में पार्टी के बुरे दिन लाने वाले या ऐसी कोशिश करने वालों तथा पराक्रम की जगह परिक्रमा को बढ़ावा देने वालों को बख्शने के मूड में नहीं हैं।
दलित समीकरण पर ध्यान
राजनाथ की टीम में प्रमुख पदाधिकारियों में यूपी से अनुसूचित जाति का चेहरा नहीं था। शाह ने इस ओर ध्यान दिया है।
राष्ट्रीय महामंत्री कठेरिया अनुसूचित जाति के हैं और उन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया है।
माना जा रहा है कि शाह ने कठेरिया को संगठन में लेकर लोकसभा चुनाव में दलितों से मिले समर्थन को संगठन में प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में डॉ. दिनेश शर्मा ब्राह्मण, युवा व नए चेहरे हैं। माना जा रहा है कि शर्मा को तरक्की देकर पार्टी नेतृत्व ने उन्हें लोकसभा चुनाव में पार्टी के निर्देशों पर काम करने का इनाम दिया है।
कुछ समझौते भी दिखते हैं टीम में
इस सबके बावजूद शाह की टीम पूरी तरह से नेताओं के समझौतों व समायोजन की कोशिश से मुक्त नहीं दिख रही है। टीम देखने से साफ पता चलता है कि पदाधिकारी तय करने में राजनाथ सिंह की सलाह प्रभावी रही है।
समझौतों की बात करें तो डॉ. शर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने लखनऊ में राजनाथ का चुनाव संभालने की ही नहीं, बल्कि चुनाव न लड़ने का भी इनाम दिया है। डॉ. शर्मा लखनऊ से टिकट के भी दावेदार थे। प्रदेश से अरुण सिंह, सिद्धार्थनाथ सिंह और श्रीकांत शर्मा को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है। ये तीनों भी टिकट के दावेदार थे।
अरुण फतेहपुर सीकरी से, सिद्धार्थनाथ सिंह फूलपुर और श्रीकांत शर्मा मथुरा से लोकसभा चुनाव लड़ना चाह रहे थे। टिकट नहीं मिला तो पार्टी ने तीनों को राष्ट्रीय टीम में जगह देकर काम करने का मौका दिया।
राजनाथ के प्रभाव की बात करें तो सुधांशु त्रिवेदी का प्रवक्ता पद पर यथावत बने रहना और अरुण सिंह का टीम में समायोजन भी इसका प्रमाण है। अरुण, राजनाथ के रिश्तेदार हैं तो त्रिवेदी उनके काफी नजदीकी।
बड़बोलापन नहीं चलेगा
शाह के टीम घोषित कर देने के बाद यह बात भी साफ हो गई है कि भले ही सूबे के तमाम नेता लोकसभा चुनाव में जीत के लिए खुद अपनी पीठ भले ही थपथपा रहे हों लेकिन भगवा रणनीतिकार व केंद्रीय नेतृत्व इससे सहमत नहीं है।
प्रभारी के रूप में उत्तर प्रदेश में लगभग एक साल सक्रिय रहे अमित शाह भले ही लोकसभा चुनाव में प्रदेश के पदाधिकारियों के हाव-भाव और कामकाज पर टिप्पणी से बचते रहे हों लेकिन वे यहां से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
इसीलिए उन्होंने प्रदेश पदाधिकारियों में किसी को भी तरक्की देने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने उन चेहरों को जगह दी है, जिनसे वे कुछ काम ले सकें।
यह संदेश यूपी के भाजपा पदाधिकारियों के लिए खतरे की घंटी भी है, जो बता रही है कि न सुधरने वालों का हाल भविष्य में वैसा ही हो सकता है जैसा कई नेताओं का हुआ है।
टीम में यूपी एक नजर में
राजनाथ की टीम में--अमित शाह की टीम में
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष--चार--तीन
राष्ट्रीय महामंत्री--एक (महामंत्री संगठन को छोड़)--एक (महामंत्री संगठन को छोड़)
संयुक्त महामंत्री संगठन- कोई नहीं--एक
मंत्री-एक--तीन
प्रवक्ता-दो--दो
मीडिया प्रभारी--एक--कोई नहीं--दस (राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ को मिलाकर)--दस