लखनऊ। महाकुंभ में हादसे के बाद कई लोग परिजनों से बिछड़ गए। इन्हें मिलाने के लिए राजधानी के एक कवि व समाजसेवी सोमनाथ कश्यप ने सोशल मीडिया पर मुहिम शुरू की है। उन्होंने पहले व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर लखनऊ व अन्य जिलों के ऐसे लोगोें को जोड़ा जो प्रयागराज गए थे या अभी भी प्रयागराज में ही हैं। इस ग्रुप में सोमनाथ को 150 अधिक लोगों से सूचनाएं मिल रही हैं। इन सूचनाओं के जरिये वे छह लोगों को उनके परिजनों से मिलवा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि ग्रुप में आने वाले खोए हुए लोगों के परिजनों के मोबाइल नंबर लेकर उनसे संपर्क करते हैं। कई लोग उत्तर प्रदेश के हैं तो कई लोग अन्य राज्यों के भी हैं। बिछड़े लोगोें के मिलने की सूचना भी ग्रुप के अलावा सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्म पर साझा की जा रही है।
हमारे सामने मची भगदड़, किसी तरह बचकर निकले
मुरादाबाद निवासी रमेश पाल सिंह, सतीश कश्यप, कामेश, इंद्रपाल, भारत सिंह और अजय प्रजापति, ट्रेन से चारबाग स्टेशन पहुंचे। वे महाकुंभ से संगम स्नान कर लौटे थे। उन्होंने बताया कि जिस समय वहां मंगलवार देर रात हादसा हुआ तो हम लोग वहीं थे। हादसे में चोटिल होते बचे और जान बचाकर निकले। रमेश पाल ने कहा, मेले में सरकारी व्यवस्थाएं बहुत अच्छी थीं। बार-बार अनाउंसमेंट के बाद भी लोग कतई मानने को तैयार नहीं थे और उसी ओर जा रहे थे जिधर उन्हें जाने से मना किया जा रहा था। बताया, दो लाेगों की मौत तो हमारे सामने ही हुई।
10-12 लड़के अचानक आए और महिलाओं को धक्का देने लगे
समस्तीपुर बिहार के रहने वाले आशुतोष अपनी मां और बहन को लेकर महाकुंभ में स्नान करने गए थे। उन्होंने बताया कि मेले में 10-12 लड़के अचानक आए और महिलाओं को धक्का देने लगे। मैंने उन्हें टोका भी, पर वे नहीं माने। बहन के पैर में भी चोट आई और वह बेहोश होने लगी तो उसके चेहरे पर पानी के छींटे मारे। आशुतोष ने बताया कि प्रशासन ने कुछ घंटों में ही स्थिति को संभाल लिया और इसके बाद सामान्य तरीके से स्नान होता रहा। प्रशासन ने संगम तट की ओर जाने वाले लोगों को रोक दिया।