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Lucknow News: सोशल मीडिया से 78 फीसदी किशोरियों की माहवारी से जुड़ी हिचक टूटी

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प्रतीकात्मक।
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लखनऊ। सोशल मीडिया से सेहत पर पड़ने वाले बुरे असर के बारे में अक्सर सुनते और पढ़ते हैं, लेकिन यह माहवारी के मामले में गुरु बन कर उभरा है। इससे किशोरियों में 78.43% मासिक धर्म को लेकर हिचक टूटी है, सेहत के प्रति अधिक जागरूक हुई हैं। ये बातें केजीएमयू के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (क्वीन मेरी) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एडोलिसेंट हेल्थ एंड डेवलपमेंट की ओर से किए गए अध्ययन में सामने आई है।
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अध्ययन में किशोरियों से लेकर 21 से 25 वर्ष की छात्राएं शामिल रहीं, जिनमें से करीब 56.20% ग्रामीण क्षेत्रों से थीं। इनमें 98.69% प्रतिभागियों के पास स्मार्टफोन था और 97.38% नियमित इंटरनेट चलाती थीं। अध्ययन प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल के संरक्षण में वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. सुजाता देव और काउंसलर सौम्या सिंह ने किया।
सबसे अधिक खोजे गए ये विषय

माहवारी स्वास्थ्य संबधी - 26.79%

एसटीआई एवं स्वच्छता-21.33%

पीरियड दर्द-17.64%
इन प्लेटफॉर्म का किया इतना इस्तेमाल
60.13% किशोरियां व युवतियाें ने यूट्यूब का उपयोग किया।

30.06% किशोरियां व युवतियों ने गूगल का उपयोग किया।

66.66% ऑनलाइन स्वास्थ्य सामग्री पर विश्वास करती हैं।
सोशल मीडिया से सीखा सही माहवारी प्रबंधन

अध्ययन में पाया गया कि माहवारी स्वास्थ्य को लेकर 58.82% युवतियों को पहली माहवारी से पूर्व जानकारी थी, जबकि करीब 41% इससे अनजान थीं। 37.25 प्रतिशत पीरियड ट्रैकिंग ऐप का इस्तेमाल करती पाई गईं। 53.59% ने ऑनलाइन माध्यमों से मासिक धर्म उत्पाद (मुख्य रूप से मेंस्ट्रुअल पैड) खरीदे। 60.13% किशोरियों ने यूट्यूब और 30.06% ने गूगल का सहारा लिया।
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एचपीवी वैक्सीनेशन की जानकारी अब भी सीमित

अध्ययन का सबसे चिंताजनक पहलू एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) वैक्सीन को लेकर सामने आया। हालांकि 50.32% युवतियों को इस बारे में पता था, लेकिन केवल 12.41% ने ही टीका लगवाया था। इनमें से भी सिर्फ 1.30% को दोनों डोज पूरी होने की जानकारी थी, जबकि 11.11% डोज की सही संख्या से अनजान थीं।

प्रतीकात्मक।

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