हाल ही कांग्रेस के कुछ नेताओं को भाजपा के सोशल मीडिया वार का जवाब देने के लिए दिल्ली में जोर-शोर से ट्रेनिंग दी गई।
दिल्ली गए तो बड़े नेताओं के दर्शन भी किए, लेकिन वहां से लौटने के बाद वही ढाक के तीन पात। कांग्रेसी दिल्ली से आत्मविश्वास से लबरेज होकर आए तो, लेकिन यह आत्मविश्वास महज कुछ दिनों तक ही रहा।
सोशल मीडिया के जरिए किस तरह वे पार्टी की नीतियों का प्रचार करेंगे, इसका खाका उनके पास नहीं है।
लिहाजा न तो कोई काम हुआ न ही कार्यकर्ताओं को इसके लिए जागरूक किया गया कि सोशल मीडिया के जरिए आम आदमी तक कैसे पहुंचा जा सके।
भले ही कांग्रेस के अधिकतर नेता एंड्रायड फोन रखते हों, उनके लिए सोशल मीडिया का मतलब सिर्फ ट्विटर ही है। जब बयान भाजपा की तरफ से आए तो सीधे उस पर प्रतिक्रिया जारी कर दी जाए।