सीनियर डीसीएम जगतोष शुक्ल ने बताया कि स्मोक डिटेक्टर एसी बोगी में एक जगह पर फिट कर दिया जाएगा, जबकि पूरे कोच में पाइपलाइन बिछी होगी, जिससे छोटे-छोटे छिद्र होंगे। ये पाइपें सिस्टम से जुड़ी होंगी। जैसे ही छिद्रो में धुंआ पहुंचेगा तो सिस्टम में लगा सक्शन मोटर इसे खींच लेगा।
इसके बाद सिस्टम में लगी लाइटें जलने लगेंगी। यदि हादसा गंभीर हुआ तो लाइट के साथ हूटर बजेगा और इमरजेंसी ब्रेक लग जाएगा। यात्रियों को बोगी से बाहर निकलने के लिए सूचित करेगा।