केंद्र द्वारा चुने गए सूबे के 11 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए तैयार किए प्रोजेक्टों के डीपीआर में कई खामियां सामने आई हैं। लिहाजा सभी प्रोजेक्टों को अब नए सिरे तैयार कराया जाएगा। संबंधित शहरों के निकायों व कंसल्टेंटों को इन त्रुटियों को दूर करते हुए 30 मई तक प्रोजेक्ट फिर से तैयार करने को कहा गया है।
दरअसल केंद्र द्वारा स्मार्ट सिटी से संबंधित प्रोजेक्टों को तैयार कराने के लिए लखनऊ के क्षेत्रीय नगरीय एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र (आरसीयूईएस) को नोडल एजेंसी के तौर पर नामित किया गया था। केंद्र ने तय किया है कि सभी शहरों केलिए तैयार प्रोजेक्ट का पहले आरसीयूईएस के स्तर पर परीक्षण किया जाएगा।
इसके बाद ही प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत आरसीयूईएस ने जब एक-एक करके इन प्रोजेक्टों से संबंधित डीपीआर की समीक्षा करना शुरू किया तो पाया कि लगभग सभी शहरों के प्रोजेक्टों को केंद्र द्वारा निर्धारित मानकों के मुताबिक तैयार ही नहीं किया गया है।
मूल बिंदुओं का ही नहीं रखा ध्यान
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प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए कंसल्टेंटों की नियुक्ति की गई है। इसके बावजूद एक भी शहर का प्रोजेक्ट मानकों के अनुरूप तैयार नहीं हुआ है। रिव्यू के दौरान यह बात सामने आई कि सभी प्रोजेक्टों में उन बिंदुओं को शामिल ही नहीं किया गया है, जो जनता की सुविधाओं और शहर की मूल जरूरतों से संबंधित हैं।
जिन प्रोजेक्ट में इन्हें शामिल भी किया गया है, तो यह मानक के मुताबिक नहीं हैं। इसके चलते ही आरसीयूईएस ने सभी शहरों के प्रोजेक्टों को बैरंग लौटा दिया है। कंसल्टेंटों व निकायों को 30 मई तक संशोधित प्रोजेक्ट तैयार करने की मोहलत दी गई है।
प्रोजेक्ट व शहर के आंकड़ों में था भारी अंतर
प्रोजेक्ट तैयार करते समय संबंधित शहर की स्ट्रेंथ, प्रमुख दिक्कतें, आर्थिक गतिविधियों व उस शहर से जुड़े संभावित खतरों पर विशेष तौर पर फोकस किया जाना था।
इसके अलावा परिवहन, सीवरेज, हाउसिंग, पेय जलापूर्ति, कचरा प्रबंधन और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित बिंदु को भी शामिल किया जाना था। नागरिकों के सुझाव में उठाए गए बिंदुओं को भी प्रोजेक्ट में शामिल किया जाना था। प्रोजेक्ट में शामिल किए गए इन सभी बिंदुओं और शहर से संबंधित मौजूदा आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया।
30 जून तक केंद्र को भेजने हैं प्रोजेक्ट
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आरसीयूईएस के अपर निदेशक एके गुप्ता के मुताबिक स्मार्ट सिटी से संबंधित प्रोजेक्टों को 30 जून तक केंद्र सरकार को भेजा जाना है। इसलिए सभी शहरों को 30 मई तक नए सिरे से प्रोजेक्ट तैयार कर लेने को कहा गया है।
आरसीयूईएस द्वारा प्रोजेक्टों का दोबारा परीक्षण करने के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति के सामने रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इन्हें केंद्र सरकार के पास भेज दिया जाएगा।
इन शहरों को बनाना है स्मार्ट सिटी
सहारनपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, रामपुर, इलाहाबाद, कानपुर, अलीगढ़, झांसी, बरेली, मुरादाबाद व आगरा।
इस पर नगर विकास विभाग के सचिव एसपी सिंह का कहना है कि रिव्यू के दौरान लगभग सभी प्रोजेक्टों में त्रुटियां सामने आई हैं। खामियों को दूर करने के लिए संबंधित शहरों केनिकायों और कंसल्टेंटों को निर्देश दिए गए हैं।