लोहिया संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञ।
लखनऊ। शिशु के लिए आरामदायक नींद बेहद जरूरी है। कम रोशनी और कम शोर के साथ त्वचा से त्वचा का संपर्क उसे सुरक्षित नींद देता है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में सोमवार को पारिवारिक देखभाल पर आधारित कार्यशाला में केजीएमयू के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक गुप्ता ने ये बातें कहीं।
केजीएमयू की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि नवजात में दर्द और तनाव के संकेतों को पहचानना अहम होता है। भूख लगने पर हाथ से मुंह दबाना सामान्य व्यवहार है। इसी तरह शिशु के अकेले आराम की स्थिति में होने पर कंबल लपेटना, अंगुली और पैर दबाना भी व्यवहार का अंग है।
लोहिया संस्थान के बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. दीप्ति अग्रवाल ने बताया कि शिशु की नाभि पर तेल या कोई भी पदार्थ नहीं लगाना चाहिए। काजल भी नहीं लगाएं और मालिश के स्थान पर हल्के हाथों से तेल लगाएं। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा मुख्य अतिथि थे। एनएचएम की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल, परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. रतन पाल सिंह के साथ संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह उपस्थित रहे।
बीमार शिशुओं की देखभाल बेहद अहम
डॉ. एसएन सिंह ने बताया कि बीमार शिशुओं की देखभाल बेहद अहम है। घरों में जाकर इसकी लापरवाही हो जाती है। यही वजह है कि पीडियाट्रक आईसीयू से बाहर आने के बाद 10 फीसदी शिशुओं की मौत हो जाती है। घर पर उचित देखभाल से इनकी जान बचाई जा सकती है।