श्रावस्ती। कड़ी मेहनत के बाद भी अपेक्षित उत्पाद न हो पाने के कारण रोजगार छोड़ रहे कुम्हारों को लोकल फार वोकल के तहत ग्रामोद्योग विभाग प्रोत्साहित कर रहा है। इससे हुनर को मिल रहे तकनीक के सहारे से कुम्हारों का उत्पादन बढ़ने से आमदनी में भी इजाफा होने लगा है। इसके लिए माटी शिल्प कला के हुनर को और निखारने के लिए न सिर्फ प्रशिक्षण दिलाया गया वरन कुम्हारों को नवीन तकनीक से जुड़े यंत्र भी निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऐसे में कुम्हार गत वर्ष की अपेक्षा इस बार दीपावली पर सस्ते मिट्टी के दीए बना कर उन्हें बेचने की तैयारी में जुटे हैं।
दीपावली का आगाज होते ही कुम्हारों के यहां चाक की रफ्तार तेज हो जाती है। इस कार्य में लगे लोग परिवार सहित दिन रात कड़ी मेहनत कर मिट्टी का दीए बनाने में जुटे रहते थे। सामान्य तौर पर प्रतिदिन औसतन 500 से 800 तक दीए ही तैयार हो पाते थे। इससे आमदनी में कमी के कारण अधिकांश लोग कुम्हारी छोड़ दूसरा रोजगार अपनाने को विवश होते थे। ऐसे में कुम्हारों को स्थापित करने के लिए ग्रामोद्योग विभाग ने उन्हें विशेष तौर पर प्रशिक्षित करने की प्रोत्साहन योजना शुरू की। इस दौरान उन्हें नि:शुल्क इलेक्ट्रॉनिक चाक सहित टूल किट भी उपलब्ध कराई गई। इससे उत्पाद में तीन गुना तक बढ़ोत्तरी होने से कुम्हारों की आय में अच्छा इजाफा होने लगा है।
आठ घंटे में बन रहे पांच सौ किलो माटी के दीपक
भिनगा निवासी कल्लू व सूफियान ने बताया कि इलेक्ट्रिक पावर व्हील से अब लगातार 12 से 16 घंटे तक काम करना संभव हो गया है। इससे आठ घंटे में चार से पांच सौ किलोग्रा तक कच्ची मिट्टी के दीपक बन रहे हैं। इब्राहिम बताते हैं कि पहले मिट्टी लाने गूथने व चाक से दीपक बनाने में काफी मेहनत लगती थी। इसके लिए दशहरा से पहले ही तैयारी शुरू हो जाती थी। लेकिन अब बहुत सहूलियत हो गई है। इलेक्टि्रक व्हील से दीपक ही नहीं खिलौने व मिट्टी के बर्तन भी तैयार करने में मदद मिल रही है।