यूपी के लोगों के लिए अच्छी खबर है। जल्द ही चेन्नई की कंपनी वाराणसी में जहां ‘इंटीग्रेटेड ऑयल रिफाइनरी’ लगाएगी, वहीं लखनऊ समेत प्रदेश के 17 शहरों में ‘वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट’ भी लगाएगी। रिफाइनरी में जहां, बायो डीजल, जेट फ्यूल और पेयजल बनेगा, वहीं वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट में कूडे़ से क्रूड ऑयल तैयार किया जाएगा।
खास बात यह कि कूड़ा प्रबंधन के लिए चेन्नई की ‘एमके एरोमैटिक लिमिटेड’ कंपनी प्रदेश में 3.5 हजार करोड़ का निवेश करेगी। पीपीपी मोड पर शुरू होने वाले इन प्रोजेक्ट में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर करीब 60 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। कंपनी के प्रस्ताव पर सरकार लगभग सहमत हो गई है, जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा हो जाएगी।
यूपी के प्रमुख शहरों में प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े का निस्तारण कराने के लिए योगी सरकार ने दक्षिण भारत के कई शहरों में कूड़ा निस्तारण परियोजनाओं का अध्ययन कराया था। नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के नेतृत्व में कुछ अधिकारियों ने चेन्नई जाकर एमके एरोमैटिक का प्रोजेक्ट भी देखा।
इस आधार पर कंपनी के निदेशक इमरान रिजवी ने सरकार को वाराणसी में इंटीग्रेटेड ऑयल रिफाइनरी और अन्य 17 शहरों में वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाने का प्रस्ताव सरकार को दिया था। कंपनी के निदेशक व अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त के बीच सोमवार को पहले दौर की बैठक हो चुकी है।
पहले पांच शहरों में लगेगा वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट
मंगलवार को नगर विकास मंत्री के साथ चर्चा हुई है। प्रस्ताव के मुताबिक प्रदेश में कूड़ा प्रबंधन के क्षेत्र में यह पहला बड़ा निवेश होने जा रहा है। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर अमल करके सरकार पर्यावरण सुरक्षा, शहरों की सफाई, युवकों को रोजगार और कूड़ा निस्तारण का उपयुक्त प्रबंधन जैसे कई काम पूरा करने की कोशिश में है।
कंपनी के निदेशक और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता में वैसे तो नगर निगम वाले 16 शहरों व शाहजहांपुर में ‘वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट’ लगाने पर चर्चा हुई है, लेकिन पहले चरण में राजधानी लखनऊ समेत 5 शहरों में ही ‘प्लांट’ लगाने पर सहमति बनी है। इनमें लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर व शाहजहांपुर शामिल हैं।
संयंत्र में विशेष तौर पर प्लास्टिक जनित कूड़ों से क्रूड ऑयल तैयार किया जाएगा। प्लास्टिक कचरे के 70- 80 प्रतिशत हिस्से से क्रूड ऑयल बनेगा जबकि शेष बचे ‘कोक’ से अगरबत्ती वगैरह बनाई जाएगी। ये सभी प्लांट सोलर एनर्जी से चलेंगे। एक प्लांट केलिए 5 एकड़ जमीन की जरूरत होगी, जो सरकार उपलब्ध कराएगी। इस प्रोजेक्ट में 500 करोड़ से अधिक का निवेश होगा।
इलाहाबाद में कुंभ को देखते हुए कंपनी ने संगम तट और वाराणसी में ‘वाटर ह्वील’ प्रोजेक्ट लगाने का भी प्रस्ताव दिया है। सरकार इस पर सहमत है। इस प्रोजेक्ट केजरिये गंगा व यमुना में बहने वाली गंदगी (वेस्ट) को जगह-जगह एकत्र कर लिया जाएगा। इसके बाद इसे प्रोसेसिंग प्लांट में पहुंचा दिया जाएगा जिससे फ्यूल तैयार होगा।
इनवेस्टर्स मीट में होगा पहला एमओयू
प्रतीकात्मक फोटो
वाराणसी में प्रस्तावित ‘इंटीग्रेटेड ऑयल रिफाइनरी’ में पूर्वांचल केसभी जिलों काकूड़ा खपाया जाएगा। रिफाइनरी को कूड़ा उपलब्ध कराने के लिए पूर्वांचल में 350 स्थानों पर छोटे प्लांट लगाए जाएंगे। यहां कूड़ा एकत्र कर रिफाइनरी को भेजा जाएगा।
इस कूड़े से बायो डीजल, जेट फ्यूल (विमान के लिए ईंधन), बिजली और पेयजल का उत्पादन किया जाएगा। इमरान रिजवी के मुताबिक शहरों में निकलने वाले एवं कृषि उपज से संबंधित कूड़ों को खपाने के लिए विश्व में पहली बार ‘पॉलीमर एनर्जी टेक्नोलॉजी’ का इस्तेमाल इस रिफाइनरी में किया जाएगा।
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय का कहना है कि यूपी में होने वाले इनवेस्टर्स मीट में सबसे पहला एमओयू इसी प्रोजेक्ट के लिए होगा। इसके लगने से कूड़ा प्रबंधन केसाथ ही शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने में भी मदद मिलेगी।
‘ कूड़ा प्रबंधन से जुड़े सभी प्रोजेक्ट पीपीपी मोड पर लगेंगे। सरकार को सिर्फ जमीन व प्रशासनिक मदद मुहैया करानी है। वैसे अगर सरकार चाहे तो इनवेस्ट भी कर सकती है। अगर सरकार निवेश करती है तो तीन साल में ही उसका पैसा वापस हो जाएगा। साथ ही प्लांट से तैयार होने वाले फ्यूल, एनर्जी व अन्य उत्पादों की बिक्री से होने वाले लाभ में उसे हिस्सा मिलेगा।’ - इमरान रिजवी, निदेशक एमटेक एरोमैटिक लिमिटेड, चेन्नई