गैर जनपद से स्थानांतरित होकर राजधानी के संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में आए मठाधीश बाबुओं ने जॉइन करते ही यहां ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने की सिंगिल विंडो सर्विस की सुगम व्यवस्था खत्म करा दी है। बाबुओं ने अब डीएल बनाने की अलग-अलग दुकानें (काउंटर) खोल ली हैं।
यानी लर्निंग, परमानेंट, कॉमर्शियल डीएल बनाने एवं नवीनीकरण का जो काम एक ही काउंटर पर होता था, उसके लिए चार काउंटर खुल गए हैं। बता दें कि आवेदकों की परेशानियों को देखते हुए सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) राघवेंद्र सिंह ने डीएल संबंधी सभी कार्य करने के लिए काउंटर नंबर 11 तय किया था।
उसमें चार बाबुओं के साथ एक वरिष्ठ बाबू को बैठाया गया था। इससे आवेदक इधर-उधर भटकने के बजाय सीधे इस काउंटर पर पहुंचकर अपना कार्य करा लेते थे। दरअसल जब से सारथी सॉफ्टवेयर का शुभारंभ हुआ है तब से कोई भी बाबू सॉफ्टवेयर पर लर्निंग, परमानेंट, कॉमर्शियल डीएल बनाने एवं नवीनीकरण करने की अप्लीकेशन को खोल कर आवेदन की प्रक्रिया को पूरा कर सकता है।
लेकिन मठाधीश को सिंगिल विंडो सर्विस रास नहीं आया। इन्होंने बड़े ‘आकाओं’ से दबाव बनवाकर डीएल के हर कार्य के अलग-अलग काउंटर खुलवा दिए हैं। आरटीओ में लर्निंग, परमानेंट, कॉमर्शियल डीएल बनाने एवं नवीनीकरण का काउंटर अलग-अलग कर देेने से आवेदक डीएल बनवाने के लिए भटकने लगे हैं।