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'सलीके' से तल्ख हुए मोदी, क्या हैं इसके मायने

Tue, 06 May 2014 09:33 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पांचवें चरण का चुनावी शोर थमने से ठीक पहले गांधी परिवार के गढ़ में उन्हीं की स्टाइल में सभी सवालों के जवाब दिए, पलटवार भी किया लेकिन सलीके से।
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गांधी परिवार के गढ़ में मोदी के इस रुख के कई मायने हैं। अमेठी में भाजपा के पक्ष में बने माहौल को वोट में तब्दील करने के लिए वे तीखेपन से बचे।

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उन्होंने राहुल गांधी को न तो शहजादा कहा और न ही युवराज। अमेठी से उसी तरह भावनात्मक रिश्ता कायम करने की कोशिश की, जैसे राहुल या प्रियंका करते हैं।

अपना भाषण विकास पर केंद्रित रखा। यह भी समझाने की कोशिश की कि अमेठी के विकास के लिए स्मृति की जीत क्यों जरूरी है?

मां-बेटे और बेटी, किसी को नहीं बख्‍शा

कांग्रेस के प्रधानमंत्री पद के अघोषित प्रत्याशी राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में नरेंद्र मोदी के तरकश से कौन से तीर निकलते हैं, इस पर राजनीतिक पंडितों की नजरें टिकी थीं।

रैली में जुटी भीड़ और लोगों के उत्साह को देखते हुए मोदी पूरी रौ में दिखे। उन्होंने अमेठी से किए गए प्रियंका के सवालों का जवाब देने के लिए यहीं की धरती को उपयुक्त जगह माना।

पढ़ें- प्रियंका ने मोदी को चुनौती देने से किया इनकार

मोदी ने सोनिया और राहुल का नाम तो लिया लेकिन जवाब और पलटवार के बावजूद प्रियंका का नाम लेने से परहेज बरतते दिखे।

उन्होंने मां, बेटे और बेटी में किसी को बख्शा नहीं, लेकिन शालीन अंदाज में निशाने पर लिया। राहुल के लिए बहन प्रियंका के कवच को तोड़ने के लिए स्मृति को अपनी छोटी बहन बताया।

बदलकर रख दूंगा को अमेठी को

अमेठी के लोगों से भावनात्मक रिश्ता बनाने के लिए मोदी ने कहा, मैंने तय किया है, 60 महीने में ऐसा बदलाव कर दूंगा कि आने वाले दिनों में दुनिया भर के विश्वविद्यालय यहां केस स्टडी करने आएंगे।

सबसे पिछड़े जिलों के विकास का रास्ता अमेठी दिखाएगा। मोदी ने गांधी परिवार के अहंकार पर भी चोट की।

प्रियंका का नाम लिए बिना कहा, वह कहती हैं कौन स्मृति? मां-बेटे (सोनिया-राहुल) भी शुरू में उनका (मोदी का) नाम ही नहीं लेते थे।

उन्होंने कहा, अहंकार जब सातवें आसमान पर होता है तो लोग सुध-बुध खो जाते हैं।

प्रधानमंत्री पैदा करने वाले परिवार को बर्दाश्त नहीं हो रहा कि एक गरीब का बेटा उन्हें ललकारेगा। जोश से लबरेज युवाओं से मुखातिब होकर मोदी ने गांधी-नेहरू परिवार को संदेश दिया।

बताया, क्यों भेजा स्मृति को अमेठी

कहा, स्मृति को अमेठी भेजने का फैसला उनका था, उन्हें छोटी बहन पर भरोसा है, दूसरों से ज्यादा।

उन्हें गुजरात में राज्यसभा सदस्य के रूप में जिस क्षेत्र में विकास का काम सौंपा, उसे शानदार और जानदार ढंग से निभाया।

तभी तय कर लिया था कि स्मृति को यूपी के सबसे पिछड़े क्षेत्र में भेजेंगे, तब दिमाग में अमेठी नहीं था।

पढ़ें- मोदी के पीछे राम-मंदिर, आयोग ने मांगी सीडी

मोदी ने कहा, उन्होंने राहुल की मुसीबत बढ़ाने के लिए स्मृति को नहीं भेजा। राहुल तो पहले से ही बहुत परेशान हैं।

स्मृति को सबसे बदहाल अमेठी की मुसीबतें कम करने के लिए भेजा है। वे 40 साल से बर्बाद क्षेत्र को संजोने आई हैं, यहां के लोगों को जिंदगी में नई जान फूंकने आई हैं।

उनकी गालियां उन्हें मुबारक

मोदी ने यह साबित करने की कोशिश की कि अमेठी से उन पर तमाम सवाल उठाए गए लेकिन वे इसकी प्रतिक्रिया में कुछ नहीं कहेंगे।

उन्होंने प्रियंका पर निशाना भी साधा, साथ ही उन्हें और गालियां देने का ऑफर भी दे दिया। कहा, वह उनसे कहती हैं कि एबीसीडी बंद करो। वे अमेठी से विकास की एबीसीडी शुरू करेंगे।

सवाल दागा, गुजरात मॉडल पर सवाल करने वाले और मोदी के बाल की खाल उधेड़ने वाले अमेठी का हाल बताएं।

वे किसी को बुरा-भला कहने नहीं आए हैं, उनकी डिक्शनरी की गालियां उन्हें मुबारक। प्रचार के चार दिन और बचे हैं, उनका भी मजा लीजिए। कहा, अच्छा है उनका (गांधी परिवार) गुस्सा निकालने के लिए मोदी काम आया है।

राजपरिवार बनाम गरीब आदमी की जंग

मोदी ने लगातार यह जताने का प्रयास किया कि लोकसभा चुनाव में लड़ाई राजपरिवार बनाम गरीब के बीच हो रही है।

‘ये दिल मांगे मोर’ संबंधी उनकी टिप्पणी पर प्रियंका के कटाक्ष का जवाब उन्होंने सोनिया गांधी से मांगा।

कहा, आपके राजपरिवार ने हम गरीबों के लिए मांगने के सिवा छोड़ा ही क्या है?

रॉबर्ट वाड्रा पर निशाना साधते हुए जवाब भी दिया, हम मांगते हैं, लूटते तो नहीं। फिर पब्लिक से बार-बार पूछा, मांगने वाला अच्छा है या लूटने वाला ?
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वाराणसी भी रहा दिमाग में

मोदी के दिमाग में वाराणसी चुनाव भी रहा। उन्होंने कहा कि मां-बेटे की सरकार को अब कोई नहीं बचा सकता।

वाराणसी में कांग्रेस प्रत्याशी को कौमी एकता दल के समर्थन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जेलों से बाहर निकालकर गठबंधन करके राजनीतिक दांव खेलना काम नहीं आएगा।

जेल के पंछी भी कांग्रेस को बचा नहीं सकते। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वोट कर दिया है, उन्होंने भाजपा की सरकार का शिलान्यास कर दिया है।
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