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क्या आपको भी लगता है कि भूख से नहीं मरा श्रीकांत?

Wed, 08 Jun 2016 04:44 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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हड्ड‌ियों का ढांचा बना श्रीकांत (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
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बाराबंकी के पकरिया गांव में भूख से मरे श्रीकांत के पेट में 50 ग्राम तरल पदार्थ मिलने के बाद अफसरों ने राहत की सांस ली है। हड्डियों का ढांचा बन चुके श्रीकांत की मौत को पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के आधार पर झुठलाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में राज्य सरकार ने डीएम से रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन का दावा है क‌ि श्रीकांत के पेट में 50 ग्राम तरल था और उसकी मौत भूख से नहीं हुई।
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जिला प्रशासन की तरफ से जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि कल्यानी देवी के दो पुत्र श्रीकांत व गुड्डू हैं और यह साथ रहते थे। इनके बड़े पुत्र श्रीकांत की मौत रविवार को हुई थी। 

इनका कहना है कि कल्यानी देवी दृष्टिहीन है और उनको पेंशन भी मिलती है। कल्यानी देवी द्वारा मई माह में पात्र गृहस्थी का खाद्यान्न लेने की भी बात कही गई है। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण पता न लगने पर विसरा प्रिजर्व करने की बात कही गई है। जिला प्रशासन की माने तो श्रीकांत की मौत भूख से नहीं बल्कि किसी और कारण से हुई है।
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हकीकत ये है कि श्रीकांत मौत के बाद भी अपनी दो गज जमीन मयस्सर नहीं हो सकी है। मुफलिसी में भूख से मरे भूमिहीन के अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों ने दूसरे के बाग का सहारा लिया। 

ग्राम विकास अधिकारी ने परिवार के पास जॉब कार्ड व अंत्योदय कार्ड होने का दावा किया लेकिन ग्रामीणों के अनुसार मृत श्रीकांत व उसकी मां कभी कोई लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों ने कहा कि कभी भी कोटा की दुकान से श्रीकांत को राशन लेते नहीं देखा गया। मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण स्पष्ट न होने से विसरा प्रिजर्व किया गया है।
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सोचने पर मजबूर कर देगी श्रीकांत की कहानी

श्रीकांत के घर में गमगीन मां - फोटो : amar ujala
बता दें क‌ि श्रीकांत के घर में 12 दिनों से अनाज का एक दाना तक नहीं था। भूख से मां और दोनों बेटे तड़प रहे थे। कोटेदार के यहां कई चक्कर लगाए, पर कार्ड नहीं था इसलिए अनाज नहीं मिला। भूख सहते-सहते बड़े बेटे ने रविवार को आखिर दम तोड़ दिया।

जैसे ही उसकी मौत की सूचना प्रशासन तक पहुंची, आनन-फानन में कोटेदार के यहां से घर में अनाज पहुंचा दिया गया। मौके पर एसडीएम समेत कई अफसर भी पहुंच गए। श्रीकांत (40) मां कल्यानी और छोटे भाई शिवाकांत के साथ झोपड़ी में रहता था। पैरों में दिक्कत के चलते वह मजदूरी पर भी नहीं जा पा रहा था।

मां ने बताया कि बेटे की मौत के बाद जब अफसर घर पहुंचे तो कोटेदार के यहां से राशन भिजवा दिया। शिवाकांत ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि श्रीकांत की मौत भूख के कारण हुई है। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पेट में 50 ग्राम तरल पदार्थ मिल जाने के बाद अफसरों की जान में जान आ गई है।
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