राजधानी में जन्मे समरजीत सिंह को देश के नवोदित निशानेबाजों की सर्वोच्च
श्रेणी में शुमार किया जाता है।
बावजूद इसके यह युवा खिलाड़ी यूपी से बाहर
अभ्यास करने को बेबस है। कारण, प्रदेश में अभी तक स्तरीय शूटिंग रेंज तैयार
नहीं हो सकी है।
करीब डेढ़ माह पहले तेहरान में हुई यूथ एशियन चैंपियनशिप
की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले यह निशानेबाज यूपी के
लिए खेलना चाहता है, लेकिन देहरादून में पढ़ने और वहीं की मझौंन शूटिंग
रेंज में अभ्यास की एवज में उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड
का प्रतिनिधित्व करना पड़ता है।
मंगलवार
को संवाददाताओं से बातचीत में समरजीत ने कहा कि लखनऊ का मूल निवासी होने के
बावजूद अपने प्रदेश के राष्ट्रीय स्तर पर खेल न पाना मेरे लिए दुखद है।
देहरादून में शिक्षा और अभ्यास के लिए साल में दस माह रहना पड़ता है, इसलिए
उत्तराखंड के लिए खेलना मेरी मजबूरी है।
अभिनव ब्रिंदा को अपना आदर्श
मानने वाले इस युवा निशानेबाज ने बताया कि वैसे तो मेरा मुख्य इवेंट 10
मीटर एयर पिस्टल है, लेकिन सेंटर फायर, स्पोर्ट्स पिस्टल और फ्री पिस्टल
जैसी स्पर्धाओं में हाथ आजमाता रहता हूं।
ओलंपिक खेलना मेरा सबसे बड़ा सपना
है। इसके बाद वहां पदक जीतना मेरा दूसरा लक्ष्य होगा।
समरजीत के पिता एवं
राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज मुकुलजीत सिंह का कहना हैं कि बेटे की सफलता
को देखकर बेहद खुशी होती है, लेकिन यह जानकार दुख भी होता कि उसे अपने
प्रदेश में भी पराया समझा जाता है।
आज तक सरकार की ओर से मेरे बेटे की
उपलब्धि पर प्रोत्साहित नहीं किया गया।