कॅरिअर देखें या परिवार संभालें फैसला खुद महिला का ही हो
औरतों को पहले खुद, फिर परिवार व समाज से संघर्ष कर सपने पूरे करने होते हैं। आसमान की ऊंचाई पर पहुंचने के लिए बेहद संघर्ष करना पड़ता है। चार प्रतिशत महिलाएं निफ्टी की कंपनियों में अहम पदों पर हैं। 59% कामकाजी महिलाएं अपने वित्तीय निर्णय स्वयं नहीं लेती हैं। ऐसे में महिलाएं कैसे आसमान छू सकती हैं, कैसे खुद को स्वावलंबी बना सकती हैं, इस पर सफल महिला शख्सियतों- मैप माय जीनोम की सीईओ अनुराधा आचार्य व मिनिस्ट्री ऑफ टॉक की फाउंडर गीतिका गंजू धर ने ये विचार रखे।
मिनिस्ट्री ऑफ टॉक की फाउंडर गीतिका गंजू धर ने कहा, कई बार महिलाओं को कॅरिअर व परिवार के बीच एक को चुनना होता है। ऐसे में हमें अपनी प्राथमिकता देखनी होती है। जब बच्चों को मां की जरूरत ज्यादा हो, तब हमें मां की भूमिका निभानी चाहिए। ऐसा हमेशा नहीं होता कि ताकतवर महिला महिला के साथ खड़ी हो। ऐसा भी होता है कि पावर आने के बाद महिलाएं मर्दों की तरह बर्ताव करने लगती हैं। महिलाओं को सपोर्ट नहीं करतीं। यह एक गलत धारणा है कि महिलाएं पैसे मैनेज नहीं कर पातीं। वह दूसरों पर निर्भर रहती हैं। जबकि हमारी संस्कृति में लक्ष्मी जी ही फाइनेंसर हैं। महिलाएं घरों को चला सकती हैं, तो पैसे मैनेज करना बड़ी बात नहीं है।
गीतिका गंजू धर ने कहा, हम सबके अंदर दुर्गा विराजमान होती हैं। बेहद संघर्ष के बाद महिलाएं किसी मुकाम पर पहुंचती हैं। ऐसे में महिलाओं को यह खुद तय करना चाहिए कि वे कब रिटायर होंगी। दूसरों के कहने या सलाह पर निर्णय नहीं लेना चाहिए। वहीं, अनुराधा आचार्य ने कहा, महिलाएं सक्षम हैं। उन्हें हमेशा खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम करना चाहिए।
मैप माय जीनोम की सीईओ अनुराधा आचार्य ने बताया कि पहले तो सिर्फ आईआईटी जाने की बात होती थी। उसके बाद यूएस जाने की होड़ लगी। मैं भी अमेरिका गई। बिजनेस स्कूल गई। फिर स्टार्टअप में काम शुरू किया। इसके बाद मैंने खुद का स्टार्टअप शुरू करने का निर्णय लिया। उस समय जीनोम नई चीज थी। मैंने वर्ष 2000 में पहली कंपनी शुरू की। उस समय भारत में ऐसी कंपनी नहीं थी। मैंने जर्मनी, नीदरलैंड, अमेरिका में कंपनियां खरीदीं। दस साल पहले हमने जीनोमिक जन्मपत्री बनाने का निर्णय लिया। इसे आप ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं। जीनोम सिक्वेंसिंग से आप बीमारियों का पता लगा सकते हैं। उनके उपचार के बारे में पता कर सकते हैं। अनुराधा आचार्य ने कहा कि पैसे का प्रबंधन बड़ी बात होती है। जैसे एक महिला घर में पैसों का प्रबंधन करती है, वैसे ही वह बाहर की दुनिया को भी मैनेज कर सकती है। बहुत-सी महिलाएं सफल बैंकर हैं।