कटरी क्षेत्र के नौ गांवों में सर्वे का काम पूरा, महज 15 फीसदी नुकसान
गंगा नदी के बाढ़ के चलते धान, उड़द, मूंग की फसल हो गई थी चौपट
संवाद न्यूज एजेंसी
रायबरेली। गंगा कटरी क्षेत्र के किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा मिलने की गुंजाइश नहीं है। कृषि विभाग की ओर किए गए सर्वे में महज 15 फीसदी का फसल नुकसान पाया गया है, जबकि 50 फीसदी फसल नुकसान होने पर ही मुआवजा दिया जाता है। नौ गांवों में सर्वे का काम पूरा हो चुका है। महज एक गांव के सर्वे का काम बाकी है। वहीं किसानों का कहना है कि उनकी फसल पूरी तरह से चौपट हो गई है। उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए।
डलमऊ और लालगंज तहसील क्षेत्र में गंगा नदी के बाढ़ के चलते कटरी क्षेत्र में रोपी गई धान के अलावा उड़द, मूंग, तिल समेत अन्य फसल नष्ट हो गई थी। जिला प्रशासन की ओर से किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए कृषि विभाग और बीमा कंपनी के अफसरों की टीमें गठित की गई थी। गठित टीमों ने गांवों में जाकर फसल नुकसान की हकीकत देखी और किसानों से मुलाकात भी की।
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पखरौली, बांसी परान, कूड़ा चक सगुनपुर, डलमऊ, चकमलिक भीटी, सनहा, आफताब नगर, कोटिया रहत माली, जमाल नगर मोहिद्दीनपुर समेत नौ गांवों में सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। इन गांवों में सर्वे से पता चला है कि धान की फसल का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इसी तरह मूंग, तिल आदि की फसलों की क्षति हुई है। कुल मिलाकर 15 फीसदी ही फसल नुकसान पाया गया है। जहांगीराबाद गांव में सर्वे काम चल रहा है।
गंगा कटरी क्षेत्र के नौ गांवों में सर्वे का काम पूरा हो गया है। शेष एक गांव में सर्वे का काम चल रहा है। जिन गांवों में सर्वे का काम पूरा हुआ है, उन गांवों के किसानों की 15 फीसदी फसल की क्षति हुई है, जबकि 50 फीसदी फसल नुकसान होने पर ही मुआवजा दिया जाता है।
-अखिलेश पांडेय, जिला कृषि अधिकारी