सपा के प्रदेश प्रभारी व वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने सोमवार को मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह से गैरहाजिर रहने पर कोई टिप्पणी नहीं की। नाराजगी के बाबत सवाल पर बोले, आज कुछ नहीं कहूंगा।
सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बजाय शिवपाल इटावा में रहे। वे रविवार दोपहर को सैफई पहुंच गए थे। वहां वे करहल (मैनपुरी) में रोजा इफ्तार में शामिल हुए। रात्रि विश्राम सैफई में ही किया।
सोमवार को दोपहर तक सैफई और हेंवरा में व्यस्त रहे। राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह समाप्त होने पर वे दोपहर 12 बजे बाद लखनऊ के लिए रवाना हुए।
मीडियाकर्मियों ने काफी कुरेदा, नाराजगी को लेकर सवाल किया लेकिन उन्होंने दोहराया, आज कुछ नहीं कहूंगा।
शपथ ग्रहण समारोह से दूरी बनाकर शिवपाल ने जताई नाराजगी
शपथ ग्रहण समारोह का एक दृश्य
- फोटो : amar ujala
शिवपाल सिंह यादव ने सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह से दूरी बनाकर अपनी नाराजगी का इजहार कर दिया है। वह कौमी एकता दल के विलय के मामले में अपनी सियासी छवि को धक्का लगने से आहत हैं।
उन्होंने मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर कौएद का सपा में विलय कराया था, लेकिन इसकी जिम्मेदारी शिवपाल पर डाल दी गई।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस विलय को रुकवाने के साथ ही इसमें भूमिका निभाने वाले मंत्री बलराम यादव को बर्खास्त कर अपराधियों के विरुद्ध कड़ा संदेश दे दिया।
शिवपाल ने 21 जून को कौमी एकता दल के सपा में विलय की घोषणा की थी। इस मौके पर कौएद के अध्यक्ष अफजाल अंसारी और उनके भाई सिगबतुल्ला अंसारी मौजूद थे।
शिवपाल ने तब सफाई दी थी कि मुख्तार अंसारी सपा में शामिल नहीं हुए हैं। इस विलय पर अखिलेश यादव ने तीखी नाराजगी जताई थी। उनके तेवरों को देखते हुए सपा संसदीय बोर्ड की बैठक बुलानी पड़ी। इसमें कौएद का विलय रद्द कर दिया गया।
खुद अखिलेश ने भी डाली थी शिवपाल के पाले में गेंद
अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
इससे पहले अखिलेश यादव ने कौएद के मुद्दे पर नाराजगी को चाचा-भतीजे के बीच की बात बताकर विलय की गेंद शिवपाल के पाले में डाली थी। संदेश गया कि शिवपाल ने मुख्तार की पार्टी का विलय कराया और सीएम ने उस पर रोक लगा दी।
विलय में मध्यस्थता करने वाले माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव को अखिलेश यादव ने 21 जून को ही मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। एक तरह से सीएम ने संदेश दिया कि पार्टी में उनकी सहमति और जानकारी के बिना फैसला करने वालों का अंजाम यही होगा। इस पूरे प्रकरण में जिस तरह घटनाक्रम चला, उससे अगर किसी की छवि को धक्का पहुंचा तो वह शिवपाल हैं।
माना जा रहा है कि इसी से नाराज होकर वे रविवार को मुलायम सिंह के आवास पर फैमिली मीटिंग में नहीं पहुंचे। इसमें अखिलेश और रामगोपाल यादव मौजूद थे। शिवपाल शनिवार से इटावा में हैं। सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह में भी वे राजधानी नहीं आए।
हालांकि उनके इटावा में कुछ कार्यक्रम थे, लेकिन वे ऐसे नहीं थे जिन्हें छोड़कर शपथ ग्रहण समारोह में न आ सकें। उनके न आने की वजह विलय मुद्दे पर राजनीतिक छवि को धक्का लगना माना जा रहा है।