सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरितमानस पर दिए गए बयान पर सपा रक्षात्मक हो गई है। पार्टी ने खुद को पूरी तरह से उनके बयान से अलग कर लिया है। अब पार्टी विधायक शिवपाल सिंह यादव ने सफाई दी है। इटावा में मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सपा स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से सहमत नहीं है। ये उनका निजी बयान है। पार्टी का इससे कोई लेना देना नहीं हैं।
शिवपाल ने कहा कि हम लोग भगवान श्रीराम व कृष्ण को मानने वाले लोग और उनके आदर्शों पर चलने वाले लोग हैं। उन्होंने पूछा कि क्या भारतीय जनता पार्टी के लोग भगवान श्रीराम के बताए रास्ते पर चलने वाले लोग हैं? उन्होंने कहा कि भगवान कभी झूठ नहीं बोलते थे लेकिन भाजपा के लोग तो राम को ही बेच रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह बहुत बड़बोले हैं। वह मैनपुरी उपुचनाव में प्रचार करने के लिए आए थे लेकिन जनता ने उन्हें सबक सिखा दिया। हम आगे भी उन्हें बताएंगे कि चुनाव कैसे लड़ा जाता है?
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सपा के कई नेताओं ने जताई आपत्ति, माफी मांगने की मांग
सपा एमएलसी के बयान पर सपाइयों ने भी आपत्ति जताई है। सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि यह उनका निजी बयान है, इससे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। नेताओं को जनता की समस्याओं आदि पर बोलना चाहिए। किसी धार्मिक पुस्तक पर बोलने से बचना चाहिए। स्वामी प्रसाद ने अज्ञानतावश बयान दिया है। उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय ने कहा कि जल्द ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलकर उनके बयान के बारे में जानकारी दी जाएगी। किसान नेता भगत राम मिश्र ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने स्वामी प्रसाद के बयान को रामचरितमानस का अपमान बताया है। कहा कि उनके इस बयान से पार्टी को नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि मौर्य ने शायद रामचरितमानस नहीं पढ़ी है। पार्टी के अन्य कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर आपत्ति जताई है।