प्रसपा संस्थापक और सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि अखिलेश यादव ने राजनीतिक अपरिपक्वता का परिचय दिया है। वह चिट्ठी लिखकर स्वतंत्र होने की दुहाई देने के बजाय विधानमंडल दल और पार्टी से निकाल देते तो बेहतर होता। उन्होंने ऐसा नहीं करके अपनी राजनीतिक समझ को उजागर किया है।
उन्होंने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि अखिलेश सियासी रणनीति बनाने में फेल रहे। इसका नतीजा रहा कि जनता का भारी समर्थन होने के बाद भी सरकार नहीं बना पाए। उन्होंने कहा कि सपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद भी किसी भी बैठक में उन्हें बुलाया नहीं गया। इसके बाद भी अब स्वतंत्र होने संबंधी पत्र लिखने की बात समझ से परे है। सपा अब वह पार्टी नहीं है, जिसे मुलायम सिंह यादव ने डॉ. लोहिया के सपने को साकार करने के लिए सींचा था। यह पार्टी लगातार सियासी तौर पर गर्त में जा रही है। एक के बाद एक चुनाव हार रही है।
शिवपाल ने कहा कि हद तो यह हो गई कि जिन लोगों ने मुलायम सिंह को अपमानित किया था, राष्ट्रपति चुनाव में सपाई उसके समर्थन में खड़े हो गए। यह एक तरह का राजनीतिक क्षरण है। भाजपा से संबंध के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह जब भी बुलाते हैं तो मिलने जाते हैं। इधर से तो कभी बुलावा आया ही नहीं। ऐसे में आखिर कहां जाएं। जहां तक सियासी सफर का सवाल है तो अभी अपनी पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं। जल्द ही अगले कदम का खुलासा करेंगे। जो लोग कुछ समय के लिए दूूर हो गए थे, वे फिर से जुड़ने लगे हैं।