सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और पार्टी से बर्खास्त सांसद रामगोपाल यादव पर आरोपों की जमकर बौछार की। कहा, मैं अपने इकलौते बेटे की कसम खाकर और गंगाजल उठाकर कह सकता हूं कि अखिलेश ने मुझसे कहा था, नया दल बनाऊंगा।
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शिवपाल ने कहा, नेताजी आप गरीबी की लड़ाई लड़ रहे थे। आज हिंदुस्तान के सबसे बड़े नेता बनने जा रहे थे। बाहरी शक्तियों से... बेईमानों से लड़ रहे थे। 2003 को याद करिए... कैसे सरकार बनी थी? किसने सरकार बनवाई थी? हमने सरकार बनवाई थी, नेताजी ने बनवाई थी।
नेताजी हम जनता के बीच रहते हैं। मेहनत करते हैं। लेकिन अब मलाई खाने वाले आ गए हैं। कहां से आ गई हैं गाड़ियां? अब सपा में वही रहेगा जो दलाली नहीं करेगा... जमीन पर कब्जा नहीं करेगा... (टोकाटाकी) जनता के बीच निकलोगे तब पता चलेगा। शिवपाल ने आरोप लगाया कि रामगोपाल ने महागठबंधन तुडुवाकर मुलायम को को देश का विकल्प नहीं बनने दिया।
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नेताजी, मैंने आपका हर आदेश माना, पर मुझे क्या मिला...
शिवपाल ने अपने भाषण की शुरुआत उस माहौल से की जब उनसे प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी लेकर अखिलेश को सौंपी गई थी। शिवपाल ने कहा- नेताजी आपका आदेश हुआ कि आपको हटाया जा रहा है... अखिलेश को अध्यक्ष बनाया जा रहा है। मैंने स्वागत किया। लेकिन मेरे साथ क्या हुआ? आपका आदेश हुआ और मेरे सभी विभाग छीन लिए गए? मेरा क्या दोष था? क्या हमने काम कम किया?
हमें पता है कि सीएम के पास समय कम होता है, विभागों की समीक्षा नहीं कर पाते। मैंने विभागों की समीक्षा की और जहां कमियां थीं, उसे ठीक कराया। जो गड़बड़ी करने वाले थे, उन पर कार्रवाई की। मैंने मंत्रियों व विधायकों की आवाज सुनी। विपक्ष के लोगों की भी सुनी। विपक्ष के लोगों ने भी मेरी तारीफ की।
शिवपाल ने कहा, नेताजी... मैंने मुख्यमंत्री का कौन सा आदेश नहीं माना? सीएम का हर आदेश माना। आपका आदेश माना। उन्होंने मौजूद विधायकों से पूछा कि उनकीसुनी या नहीं सुनी? शिवपाल ने कहा कि मैंने तो कहा था कि बिना विभाग का मंत्री बना दो। बताइये मैंने कम काम किया?... सीएम नहीं बुलाते तब भी जाता था, मिलता था।
जिनके 10 वोट नहीं, नेताजी को पीछे कर दिया
नेताजी लोहिया हॉल की बैठक याद होगी। मैंने कहा था कि देश भर के चरणवादी, लोहियावादी लोगों को इकट्ठा करेंगे। देवगौड़ा, चौटाला, नीतीश व लालू से लेकर सभी लोग आ गए। ...(भीड़ से किसी ने मुख्तार का नाम लिया) शिवपाल ने कहा कि - इतने झूठे लोग हो, मुख्तार को किसी ने जॉइन नहीं कराया। नेताजी... ये पार्टी में रहने लायक नहीं।
गुंडे, दलाली करने वाले, झूठे लोगों को बर्दाश्त नहीं कर सकते। जिनके 10 वोट नहीं वे महागठबंधन का विरोध कर रहे थे। वे तब विरोध कर रहे थे जब दूसरे लोगों ने सपा का झंडा व नाम भी स्वीकार कर लिया था। सांप्रदायिक शक्तियों से मिले थे ऐसे लोग। बताइए नेताजी को किसने पीछे किया? बीजेपी से जो लोग मिले थे।
मैंने कभी अमर का साथ नहीं छोड़ा
शिवपाल ने कहा कि मैंने कभी अमर सिंह से संपर्क नहीं तोड़ा। जब भी कोई फंक्शन हुआ, गए। हम छिपने वालों में नहीं हैं। (नारेबाजी...शोर) नारे लगाने से सरकार नहीं बनेगी। सरकार को नुकसान हो रहा। इन्हें पार्टी से बाहर करना पड़ेगा। नेताजी, आपकी इजाजत होगी तो इन्हें बाहर करेंगे।
नेताजी, जितने लोहियावादी हैं, जितने समाजवादी हैं... उनको हम इकट्ठा करेंगे। अब आपको नेता मानने की जरूरत। कुछ दलालों, लुटेरों से जनता की नफरत है, उनसे वोट नहीं मिलेगा। (नारेबाजी...) मुख्यमंत्री जब प्रदेश अध्यक्ष थे, मेरे कहने पर जसवंत नगर में एक क्षेत्रीय सदस्य तक नहीं बनाया, प्रदेश छोड़ दीजिए। ...क्या मैंने सीएम को कमजोर किया?
(नारेबाजी) ...यह बताना चाहता हूं कि सरकार में मंत्री की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। समझ लीजिए... जान लीजिए... सपा में रहना है तो अनुशासन में रहना होगा। रजत जयंती में पूरी ताकत से आना... 2017 में नेताजी के नेतृत्व में फिर सरकार बनानी है।
अजित सिंह से न मिलता तो न राज्यसभा जीतते न एमएलसी
शिवपाल ने कहा, अजित सिंह की बात कर लीजिए। नेताजी... अजित सिंह के पास आपने भेजा था। अगर अजित सिंह से बात न की होती तो राज्यसभा व एमएलसी हार जाते। सीएम ने तो किसी से संपर्क भी नहीं किया था। पूछ लीजिए... पूछ लीजिए।
दूसरे लोगों को मैंने बुलाया था। दो एमएलए को मिलाने मैं ले गया था। (बीच में आवाज) नेताजी क्या मायावती के खिलाफ मैं नहीं लड़ा था? आज यहां दो एजेंडे पर बात होनी थी। रजत जयंती समारोह और 2017 का चुनाव। लेकिन यहां क्या-क्या बातें होने लगी? (शोर) नेताजी हमें छूट दे देना... हम इन्हें बाहर कर देंगे।