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राममंदिर के साथ ‘भइया’ का वोट भी साध रही शिवसेना

Sat, 24 Nov 2018 08:53 PM IST
धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
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अयोध्या पहुंचे उद्धव ठाकरे
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राममंदिर के साथ शिवसेना मुंबई के ‘भइया’ यानि उत्तर भारतीय वोट बैंक को भी साधने में जुटी है। पहले मंदिर फिर सरकार...के पीछे उत्तर भारतीयों को खासी प्रमुखता मिल रही है। यहां महाराष्ट्र से आए करीब पांच हजार शिवसैनिकों में 50 फीसदी पूरब के लोग शामिल हैं।

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अवध के विभिन्न जिलों के अलावा जौनपुर, गाजीपुर, भदोही, इलाहाबाद, आजमगढ़ आदि जिलों के शिवसैनिकों को अयोध्या की कमान सौंपी गई है। इन्हें अनुशासन और धैर्य के साथ न सिर्फ उद्धव ठाकरे के कार्यक्रम में हवा बनानी है बल्कि विहिप की धर्मसभा में भी जाकर रामभक्तों को मोदी से सावधान करने और उद्धव के नेतृत्व की अहमियत समझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  
अयोध्या आए मराठी शिवसैनिकों को खास ताकीद दी गई है कि वे हिंदी में ही बात कर दिल जीतने की पूरी कोशिश करेंगे। कोई भड़काऊ एक्टिविटी नहीं दिखनी चाहिए। इसलिए शिवसेना के उग्र तेवर वाले युवा और महिला विंग को अयोध्या जाने की इजाजत नहीं दी गई।
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मुंबई हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एके दूबे जौनपुर जिले के रामपुर के रहने वाले हैं। वे कल्याण विहिप के कार्याध्यक्ष हैं। कहते हैं कि अयोध्या आने से ठीक पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट संदेश दिया था कि अयोध्या में शिवसैनिकों को अपने अनुशासन और धैर्य की परीक्षा देनी है। तभी उन्होंने महाराष्ट्र में उग्र मानी जाने वाली महिला सेना और युवा सेना को स्पष्ट रूप से अयोध्या जाने से मना कर दिया था।

वे कहते हैं कि हम विहिप से जुड़े हैं लेकिन मुंबई में शिवसेना हिंदुत्व को लेकर भाजपा से ज्यादा प्रखर है। उत्तर भारतीयों के मन में शिवसेना की अब पुरानी छवि नहीं रही। राममंदिर मुद्दे पर पहले मंदिर फिर सरकार के नारे ने उद्धव ठाकरे को और चहेता बना दिया है। वे साफ बात करते हैं मोदी-योगी की तरह ढुलमुल नहीं हैं।

कल्याण में बिल्डर माधव सिंह भी अयोध्या आए हुए हैं, वे गाजीपुर के रहने वाले हैं। कहते हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में आम ‘भइया’ वोट कांग्रेस और भाजपा को बाय-बाय करने वाला है। आजमगढ़ के लालगंज निवासी रामआसरे पहुंचू चौहान भी कल्याण में बिल्डर हैं। कहते हैं कि राममंदिर आंदोलन का बिगुल अयोध्या से फूंककर शिवसेना प्रमुख ने उत्तर भारतीयों का दिल जीत लिया है।

अमेठी के महेश राम कृपाल त्रिपाठी मुंबई में कॉलेज चलाते हैं। बोले-40 साल से महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से देख रहे हैं। मातोश्री का चेहरा काफी बदल गया है। अयोध्या चलो...के नारे ने तो उत्तर भारतीयों को मराठियों का नेतृत्व करने का मौका दिया है। 25-25 की बनाई गई टोली में भइया ही सुप्रीम हैं। यहां शिवसेना का कार्य व्यवहार देख एक नया संदेश पूरे विश्व में जाएगा।

कल्याण में रिक्शा चलाने वाले मनोहर दादा राम आठवले और मनोहर शंकर राने के साथ भदोही निवासी मुंबई के डोंबीवली में रिक्शा चलाने वाले बबलू उपाध्याय शिवसेना के नए रूप से खासे प्रभावित दिखे। बोले कि अगले चुनाव में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए उत्तर भारतीयों का 80 फीसदी समर्थन शिवसेना को मिलेगा। समाजसेवी भदोही निवासी विश्वनाथ दुबे हों या डोंबीवली में ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करने वाले सागर, सभी की जुबान पर जय भवानी, जय शिवसेना...का नारा था।

मराठी शिवसैनिक तात्या साहब माने, रमेश गांगे, शरद पाटिल, अनंत रे कहते हैं कि कल्याण में अंबरनाथ का बुआ पाड़ा, कल्याण ईस्ट, खड़े गोलवली, शंकर पान्से रोड, कोलसे वाड़ी, उल्लासनगर समेत कई इलाके उत्तर भारतीयों के गढ़ हैं। यहां चार लाख उत्तर भारतीय वोट निर्णायक होता है। अब शिवसेना इन्हें पूरी तरह साध चुकी है। हम लोग हिंदी बोलना सीख चुके हैं, उत्तर भारतीयों के हर दुख-सुख में कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं।  

महाराष्ट्र की छह लोकसभा क्षेत्रों से आए हैं शिवसैनिक

अयोध्या में एकत्रित हुए शिव सैनिक
दो ट्रेनों में अयोध्या आए करीब पांच हजार शिवसैनिक महाराष्ट्र की छह लोकसभा क्षेत्रों से हैं। पहला जत्था थाणे से शुक्रवार रात्रि 10 बजे पहुंचा, जबकि दूसरा जत्था नासिक से शनिवार सुबह 7 बजे यहां पहुंचा। कल्याण के नगर सेवक शरद पाटिल और अनंत रे कहते हैं कि शिवसेना महाराष्ट्र में ही नहीं उत्तर भारत में भी 2019 के चुनाव में दम दिखाएगी। भाजपा बाप बनने की कोशिश कर रही है। महाराष्ट्र में 50-50 सीट की बात कर रही है। जबकि अकेले शिवसेना उत्तर भारतीयों के समीकरण के साथ सबसे ज्यादा सीटें जीतेगी। 
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महानगर पालिका चुनाव में भी धूम मचा चुके हैं उत्तर भारतीय 

शिव सैनिक
मुंबई महानगर पालिका के हाल में हुए चुनाव में उत्तर भारतीय समीकरण का खासा दबदबा दिखा था। 227 सीटों में 150 सीटों पर उत्तर भारतीय मतदाता निर्णायक की भूमिका में रहे। कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 36 सीटें उत्तर भारतीयों को दी थी, जबकि भाजपा ने 25, राकापा ने 13 और शिवसेना ने चार सीटें दी थी। उत्तर भारतीयों का मुखर विरोध करने वाली मनसे ने भी एक सीट पर उम्मीदवार उतारा था। इन्हें साधकर भाजपा ने शिवसेना को अपना मजबूत दम दिखाया था। इसी के बाद से शिवसेना काफी सचेत हुई है। अयोध्या आए वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर पाठक हड़िया इलाहाबाद के निवासी हैं। वे कहते हैं कि रिटायर होने के बाद उन्हें सबसे अच्छी शिवसेना लगी इसलिए भगवा धारण कर अयोध्या आए हैं। पहले मंदिर फिर सरकार उत्तर भारतीयों के वोट बैंक पर शिवसेना की पकड़ साबित करेगा।
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