जल्द 26 हजार और शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया जाएगा। राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। हालांकि औपचारिक घोषणा 18 अप्रैल को होने वाली उच्चस्तरीय बैठक के बाद होने की संभावना है। इन शिक्षामित्रों ने दूसरे और तीसरे चरण में बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
राज्य सरकार अब तक 1.37 लाख शिक्षामित्रों को समायोजित कर चुकी है। कुछ लोग शिक्षामित्रों के समायोजन के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। पिछले साल 12 सितंबर को हाईकोर्ट ने समायोजन को अवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार और शिक्षामित्र सुप्रीम कोर्ट गए, जहां से उन्हें राहत मिली। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे दे दिया। इससे समायोजित शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक सहायक अध्यापक का वेतन देने में आई अड़चन खत्म हो गई।
दूसरे बैच के 14 हजार व तीसरे बैच के 12 हजार वंचित
अभी भी दूसरे बैच के 14 हजार और तीसरे बैच के 12 हजार शिक्षामित्र समायोजन से वंचित हैं। सूत्रों के मुताबिक, विशेषज्ञों से परामर्श के बाद सरकार ने बचे 26 हजार शिक्षामित्रों को भी समायोजित करने का फैसला लिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट अपने अंतिम आदेश में शिक्षामित्रों के समायोजन को सही ठहरा देता है तो बचे शिक्षामित्रों को यह कहने का मौका मिलेगा कि सरकार ने समायोजन में देरी कर उनके साथ अन्याय किया।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट समायोजन रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराता है तो जिस तरह 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द होगा, वही हश्र इन 26 हजार शिक्षामित्रों का भी होगा।
चूंकि, स्टे मिलने से 12 सिंतबर 2015 से पहले वाली स्थिति बहाल हो गई है, इसलिए इन्हें समायोजित करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है।
समायोजन के लिए बेसिक शिक्षा मंत्री को ज्ञापन
उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बेसिक शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर 26 हजार शिक्षामित्रों को जल्द समायोजित करने की मांग की है।
जिसमें कहा है कि 3500 रुपये मानदेय पर पढ़ा रहे शिक्षामित्र दो जून की रोटी का जुगाड़ नहीं कर पा रहे।