शिया वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस प्रकरण में प्रतिवादी है और हाईकोर्ट में भी था। चूंकि सुन्नी वक्फ बोर्ड मुकदमे को लड़ रहा था, इसलिए शिया वक्फ बोर्ड ने अपना पक्ष कभी कोर्ट में नहीं रखा, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि शिया बोर्ड अब मुकदमे में अपना पक्ष नहीं रख सकता।
उन्होंने कहा कि पूरा मामला बातचीत से तय हो सकता था। इस वजह से सुन्नी वक्फ बोर्ड और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से शिया वक्फ बोर्ड अलग हट गया है।